रिश्वत में शामिल बैंकरों पर जरूर होनी चाहिए कार्रवाई, लेकिन NPA का सारा ठीकरा उन पर फोड़ना सही नहीं: रजनीश कुमार

SBI के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "कुछ मामलों में, बैंकरों को दोषी ठहराया ठीक है, लेकिन NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) की पूरी समस्या का दोष उन पर डालना उचित नहीं है। अगर बैंकर ने किसी तरह के रिश्वत के बदल लोन को मंजूरी दी है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सारा दोष बैंकरों पर डालना सही नहीं है।"

अपडेटेड Jan 05, 2023 पर 7:45 PM
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SBI के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार

भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पूर्व चेयरमैन रजनीश कुमार ने गुरुवार 5 जनवरी को कहा कि किसी तरह के किसी भी तरह का रिश्वत लेने वाले बैंकरों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन बैड लोन का सारा दोष बैंकरों पर डालना सही नहीं है। कुमार ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "कुछ मामलों में, बैंकरों को दोषी ठहराया ठीक है, लेकिन NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) की पूरी समस्या का दोष उन पर डालना उचित नहीं है। अगर बैंकर ने किसी तरह के रिश्वत के बदल लोन को मंजूरी दी है, तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सारा दोष बैंकरों पर डालना सही नहीं है।"

रजनीश कुमार की टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब केंद्रीय जांच एसेंजी CBI ने कुछ दिनों पहले ICICI बैंक की पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को 3,250 करोड़ रुपये के वीडियोकॉन लोन घोटाला मामले में गिरफ्तार किया है।

CBI ने साल 2009 से 2011 के बीच वीडियोकॉन ग्रुप की कंपनियों को दिए गए लोन में धोखाधड़ी और अनियमितताओं का आरोप लगाया है। उस वक्त चंदा कोचर ICICI बैंक की बॉस थीं। इस मामले में लंबी जांच के बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है। इससे पहले ICICI बैंक ने कोचर के सीईओ कार्यकाल को समाप्त करते हुए उन्हें रिटायरमेंट से जुड़े लाभ देने से भी वंचित कर दिया था।


CBI ने इस मामले में चंदा कोचर, उनके पति और वीडियोकॉन ग्रुप के फाउंडर वेणुगोपाल धूत के साथ-साथ नूपावर रिन्यूएबल्स, सुप्रीम एनर्जी, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड पर आपराधिक साजिश और प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के विभिन्न प्रावधानों के तहत मामला केस दर्ज किया है।

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सीबीआई ने आरोप लगाया है कि वीडियोकॉन के प्रमोटर वेणुगोपाल धूत ने 2012 में ICICI बैंक से 3,250 करोड़ रुपये का लोन हासिल करने के बदले में नूपावर में करोड़ों रुपये का निवेश किया।

लोन को बट्टे खाते में डालना

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने दिसंबर में जारी अपनी फाइनेंशियल स्टैबिलिटी रिपोर्ट (FSR) में बताया कि बैंकों का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross-NPA) सितंबर 2022 में सात साल के निचले स्तर 5% पर आ गया। वहीं बैंकों का नेट नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Net NPA) 10 साल के निचले स्तर 1.3 प्रतिशत पर आ गया।

हालांकि सरकार ने हाल ही में यह भी संसद में बताया कि, बैंकों ने पिछले पांच वित्त वर्षों के दौरान 10,09,511 करोड़ रुपये के लोन बट्टे खाते में डाले हैं। किसी लोन को आमतौर तब बट्टे खाते में डाला जाता है जब उसकी वसूली की कोई गुंजाइश नहीं होती है और बैंक इस बैड एसेट्स को अपनी बैलेंस शीट से हटाना चाहते हैं। बैंकों को अपने मुनाफे पर असर डालने वाले ऐसे लोन को कवर करने के लिए प्रोविजंस के रूप में अलग पैसा रखना पड़ता है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में एक सवाल के जवाब में बताया कि जिन लोगों के लोन बट्टे खाते में डाले गए हैं, वे लोन के भुगतान के लिए उत्तरदायी बने रहेंगे और इन लोगों से बकाया राशि की वसूली की प्रक्रिया जारी है।

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