होम लोन के लिए क्या करें एनआरआई!

भारत में घर खरीदना बहुत से एनआरआई (नॉन रेसीडेंट इंडीविजुएल) के लिए प्राथमिकता में से एक होता है।

अपडेटेड Jan 02, 2013 पर 11:41 AM
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भारत में घर खरीदना बहुत से एनआरआई (नॉन रेसीडेंट इंडीविजुएल) के लिए प्राथमिकता में से एक होता है। रुपये की घटती कीमत के चलते उनकी खरीदने की शक्ति काफी बढ़ जाती है।

जो लोग घर खरीदना चाहते हैं उनके लिए घर हासिल करने के लिए होम लोन लेना एक अहम तरीका होता है। वहीं बहुत से लोगों के लिए होम लोन केवल पैसा जुटाने का साधन है। हालांकि ये इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। होम लोन के जरिए आप घर की कीमत का एक बड़ा हिस्सा कुछ समय में चुका सकते हैं। साधारण तौर पर बैंक एनआरआई को 15 साल तक के लोन दे सकते हैं और कुछ मामलों में ये अवधि 20 साल तक बढ़ाई जा सकती है। मौजूदा नियमों के मुताबिक  अगर एनारआई घर की 20 फीसदी कीमत का इंतजाम कर लेता है तो बैंक घर की 80 फीसदी कीमत का लोन दे सकते हैं जिसमें रजिस्ट्रेशन और स्टॉम्प ड्यूटी का खर्च भी शामिल होता है। बैंक उसी सूरत में लोन देने के लिए तैयार होते हैं अगर उन्हें भरोसा होता है कि आप लोन की रकम चुकाने में सक्षम होंगे।

आपके लोन चुकाने की क्षमता जानने के बाद बैंक को काफी सारे दस्तावेज चाहिए होते हैं। आपको अपना पासपोर्ट और एम्पलॉयमेंट सर्टिफिकेट (जो अंग्रेजी में हो) प्रस्तुत करना होता है। जिस देश में आप रहे रहे हैं बैंक आपसे उस देश की क्रेडिट ब्यूरो रिपोर्ट मांगते हैं। विकसित देशों जैसे अमेरिका, इंग्लैंड में कर्ज लेने वाले व्यक्ति की कर्ज चुकाने की क्षमता जानने के लिए क्रेडिट रिपोर्ट की जांच की जाती है। जिस देश में आप वर्तमान में रह रहे हैं अगर उस देश में आपने अपने कर्ज नहीं चुकाए हैं तो आपका क्रेडिट स्कोर गिरावट में जाएगा और ऐसा ही भारत में भी होगा।

आजकल भारतीय बैंक आपकी भारतीय क्रेडिट रिपोर्ट को भी जांचते हैं। अगर आपने अपने एजूकेशन लोन, होम लोन, पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का भुगतान नहीं किया है तो क्रेडिट रिपोर्ट इसका खुलासा कर देती है। अगर आपका क्रेडिट स्कोर खराब है तो बैंक आपका होम लोन देने से इंकार कर सकते हैं। 750 से ऊपर का क्रेडिट स्कोर अच्छा कहलाता है। तो बेहतर है कि आप जिस देश में रह रहे हैं और भारत दोनों में अपने क्रेडिट रिपोर्ट की जांच कर लें। अगर आप के पास सभी दस्तावेज हैं तो आप भारत में प्रॉपर्टी खरीदने के लिए देख सकते हैं।

ज्यादातर एनआरआई नए प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदना पसंद करते हैं जिसमें सभी सभी सुख सुविधाएं हों। कुछ मामले में वो ऐसे फ्लैट खरीदते हैं जिसमें कंस्ट्रक्शन चल रहा है। ऐसी सूरत में ये देखना चाहिए कि बिल्डर के पास एनआरआई को मकान बेचने का सर्टिफिकेट हो। साथ ही प्रॉपर्टी को बेचने वाले की पूरी जानकारी हो चाहे प्रॉपर्टी नई हो या दोबारा बेची जा रही हो। आपको देखना चाहिए कि प्रॉपर्टी बैंक के साथ मॉर्टगेज है या नहीं। अगर प्रॉपर्टी मॉर्टगेज है तो आपको नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट हासिल करना होगा। अगर आप ये खुद नहीं कर सकते या आप ऐसे किसी वकील को नहीं जानते जो आपकी मदद कर सके तो आपको होम लोन के लिए सोचना चाहिए। आपको होम लोन देते समय बैंक खुद ये सब कानूनी कार्रवाई कर लेगा। हालांकि बैंक इसके लिए प्रोसेसिंग फीस लेते हैं लेकिन ये ठीक ही है कि बैंक अपना हित देखने के लिए आपका भी हित देख ले।

जब एक होम लोन पारित हो जाता है तो ये रुपये में मिलता है तो आपको इसे नॉन रेसीडेंट बाहरी अकाउंट या नॉन रेसीडेंट साधारण बैंक अकाउंट के जरिए इसे चुकाना होता है भले ही आपके पास भारत में पहले से ही एक अकाउंट हो जो चालू हालत में है। इसके अलावा भी कुछ ऐसी बातें हैं जो एनआरआई को घर खरीदने से पहले करनी चाहिए अगर उसने होम लोन लिया है।


पहला उसे ऐसे व्यक्ति का चुनाव करना चाहिए जिसपर उसे भरोसा हो और उसे पॉवर ऑफ अटॉर्नी दी जा सके ताकि वो सभी कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम हो। दूसरा एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस प्लान खरीदें जिससे कर्ज लेने वाले और उसके सहयोगी का हित सुरक्षित हो सके। इससे अगर कोई दुर्घटना होती है तो घर आपके परिवार के पास ही रहेगा और आपके सहयोगी कर्जधारक की क्रेडिट रिपोर्ट पर भी कोई आंच नहीं आएगी।

इन बातों को ध्यान में रखकर आप भारत में घर खरीदने से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा कर सकते हैं और प्रॉपर्टी खरीदने में आने वाली दिक्कतों का सामना करने के लिए तैयार हो सकते हैं। आप भारतीय हैं या एनआरआई इस बात से इतना फर्क नहीं पड़ता। ये विश्वास की बात है और एक संस्था और व्यक्ति के बीच होने वाले आदान प्रदान में भरोसे की बात है।

ये लेख क्रेडिट विद्या के को फाउंडर और डायरेक्टर राजीव राज ने लिखा है। राजीव राज से आप rajiv.rajcreditvidya.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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