दिखावे पर न जाएं, अपनी अक्ल लगाएं! हॉलिडे और क्लब मेंबरशिप स्कीम्स आजकल ग्राहकों को बड़े सपने दिखाती हैं। कम कीमत में शानदार रिसॉर्ट, हर साल लंबी छुट्टियां और टेंशन-फ्री वेकेशन का वादा। लेकिन क्या हर ऐसा वादा सच में जमीन पर उतरता है? और अगर ग्राहक को सर्विस नहीं मिलती, तो क्या अदालत हमेशा उसके पक्ष में फैसला देती है? पंजाब के एक ग्राहक से जुड़ा यह मामला बताता है कि सिर्फ पैसे देना ही काफी नहीं होता, बल्कि शर्तें समझना और उनको मानना भी उतना जरूरी है। 60,000 रुपये खर्च करने के बावजूद छुट्टी न मिल पाने के इस मामले में राज्य ग्राहक आयोग ने ग्राहक के बजाय कंपनी के पक्ष में फैसला दिया। ये फैसला ग्राहकों के लिए सबह है कि सिर्फ बोले गए वादे पर न जाए, लिखित में जो शर्तें लिखी हैं। उसे समझकर ही साइन करें।
