RBI MPC: लोन लेने वालों को राहत मिलेगी या नहीं, जानिए क्या कह रहे एक्सपर्ट्स

RBI की MPC बैठक में क्या EMI पर राहत मिलेगी या इंतजार बढ़ेगा? एक्सपर्ट्स से जजानिए कैसे महंगाई, क्रूड और ग्लोबल हालात तय करेंगे आपके होम लोन का भविष्य।

अपडेटेड Apr 07, 2026 पर 1:17 PM
Story continues below Advertisement
केंद्रीय बैंक 8 अप्रैल को अपनी मौद्रिक पॉलिसी पेश करेगा। उसमें वह एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट शुरू करने का ऐलान कर सकता है।

RBI MPC: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) वित्त वर्ष 2026-27 की पहली बैठक करने जा रही है। ऐसे में होम लोन लेने वाले और EMI भरने वाले लोग ब्याज दरों पर नजर बनाए हुए हैं।

छह सदस्यीय MPC की बैठक सोमवार, 6 अप्रैल से शुरू होगी। इसका फैसला बुधवार, 8 अप्रैल को आने की उम्मीद है। RBI हर वित्त वर्ष में आमतौर पर हर दो महीने पर कुल छह बैठकें करता है। इन बैठकों में ब्याज दर, मनी सप्लाई, महंगाई और अन्य आर्थिक संकेतकों पर फैसला लिया जाता है।

होम लोन दरें क्यों अहम हैं


RBI का रेपो रेट सीधे बैंकों की लोन दरों को प्रभावित करता है। जब रेपो रेट घटता है, तो बैंक आमतौर पर होम लोन सस्ता कर देते हैं, जिससे EMI कम हो सकती है। वहीं अगर दरें नहीं घटतीं, तो EMI में राहत की उम्मीद भी कम हो जाती है।

एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं

समाचार एजेंसी PTI के मुताबिक, ज्यादातर एक्सपर्ट मान रहे हैं कि इस बार RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। ICRA की चीफ इकोनॉमिस्ट अदिति नायर का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों और जियोपॉलिटिकल हालात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में RBI फिलहाल रुककर महंगाई के आंकड़ों को देखना चाहेगा।

SBI के चीफ इकोनॉमिस्ट सौम्य कांति घोष के मुताबिक, वैश्विक संकट का असर भारत पर भी पड़ रहा है। रुपया 93 प्रति डॉलर से ऊपर बना हुआ है और कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है, जिससे आयातित महंगाई बढ़ रही है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का कहना है कि इस बार न तो रेपो रेट में बदलाव होगा और न ही पॉलिसी रुख में। RBI सतर्क नजर आएगा और GDP व महंगाई के अनुमान पर ज्यादा फोकस रहेगा।

हाउसिंग डिमांड पर क्या होगा असर?

BASIC Home Loan के CEO अतुल मोंगा के मुताबिक, इस बार RBI से रेट कट की उम्मीद नहीं है। मौजूदा हालात को देखते हुए ब्याज दर जस की तस रह सकती है।

मोंगा ने कहा कि अब दरों में स्थिरता से थोड़ी राहत दिख रही है। अगर RBI यही रुख बनाए रखता है, तो हाउसिंग डिमांड बढ़ सकती है। डिजिटल और आसान लोन प्रोसेस की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। स्थिर दरें और बेहतर लिक्विडिटी से लोन तक पहुंच आसान हो सकती है और सेक्टर को सपोर्ट मिलेगा।

रियल एस्टेट इंडस्ट्री की राय

भूटानी इंफ्रा के CEO आशीष भूटानी का कहना है कि स्थिर रेपो रेट केवल मौद्रिक निर्णय नहीं, बल्कि होमबायर्स, डेवलपर्स और निवेशकों के लिए भरोसे का संकेत है। देश के उभरते शहरी कॉरिडोर विकास के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए नीति में निरंतरता जरूरी है। हमें उम्मीद है कि RBI स्थिरता बनाए रखेगा और रियल एस्टेट को आर्थिक विकास व रोजगार का मजबूत इंजन बनाए रखेगा।

वहीं अमरावती ग्रुप के चेयरमैन रजनीकांत मिश्रा ने कहा कि RBI से उम्मीद है कि वह महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन रखते हुए रेपो रेट स्थिर रखेगा। इससे बाजार और उधारकर्ताओं को स्थिरता मिलेगी।

अब तक क्या हुआ है

फरवरी 2025 से अब तक RBI रेपो रेट में कुल 1.25% की कटौती कर चुका है। हालांकि अगस्त 2025, अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 की बैठकों में दरों को स्थिर रखा गया था। ग्लोबल अनिश्चितता को देखते हुए इस बार भी RBI सावधानी के साथ फैसला ले सकता है।

लोन लेने वालों को RBI के फैसले पर नजर रखनी चाहिए। अगर रेपो रेट में बदलाव होता है, तो इसका सीधा असर EMI और लोन की लागत पर पड़ेगा। अगर दरें स्थिर रहती हैं, तो EMI में तुरंत राहत मिलने की उम्मीद कम है।

सरकार ने सस्ता किया सोने-चांदी का इंपोर्ट, क्या खरीदारों को भी मिलेगी राहत? समझिए पूरा हिसाब

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।