RBI New Rules: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ऑनलाइन ठगी को रोकने के लिए नए कदमों पर विचार कर रहा है। इसमें बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन में देरी और सीनियर सिटिजन्स के पेमेंट्स पर अतिरिक्त जांच जैसे उपाय शामिल हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, गुरुवार को जारी डिस्कशन पेपर में यह जानकारी दी गई है।
बड़े ट्रांजैक्शन पर देरी, फ्रॉड पर नजर
देश में डिजिटल पेमेंट फ्रॉड तेजी से बढ़े हैं। फर्जी कॉल सेंटर, म्यूल अकाउंट और डीपफेक जैसे नए तरीके इसमें इस्तेमाल हो रहे हैं। इसे देखते हुए RBI ने प्रस्ताव दिया है कि 10,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर एक घंटे की देरी हो।
यह नियम UPI जैसे फास्ट सिस्टम पर भी लागू होगा, ताकि ग्राहक को ट्रांजैक्शन रोकने का मौका मिल सके। हालांकि मर्चेंट पेमेंट्स पर यह लागू नहीं होगा।
छोटे पेमेंट तुरंत, संदिग्ध पर अलर्ट
RBI ने कहा है कि इस देरी के दौरान पैसे का अस्थायी डेबिट होगा और अगर ट्रांजैक्शन संदिग्ध लगा तो तुरंत अलर्ट दिया जाएगा। वहीं छोटे ट्रांजैक्शन पहले की तरह तुरंत होते रहेंगे, ताकि रोजमर्रा के पेमेंट पर असर न पड़े।
आंकड़ों के मुताबिक 2021 से 2025 के बीच फ्रॉड के मामले 10 गुना बढ़कर 28 लाख हो गए। इससे नुकसान 230 अरब रुपये तक पहुंच गया।
बुजुर्गों के लिए अलग सुरक्षा
RBI बुजुर्ग और कमजोर ग्राहकों के लिए भी खास सुरक्षा लाने की तैयारी में है। प्रस्ताव के तहत 70 साल से ऊपर के लोगों और दिव्यांग व्यक्तियों को 50,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन के लिए 'ट्रस्टेड पर्सन' की मंजूरी लेनी पड़ सकती है। हालांकि, उन्हें इससे बाहर निकलने का विकल्प भी मिलेगा।
इसके अलावा कुछ खातों पर लिमिट लगाने और 'किल स्विच' जैसी सुविधा लाने का भी सुझाव है। इससे जरूरत पड़ने पर सभी डिजिटल पेमेंट तुरंत बंद किए जा सकें। RBI ने इस पर 8 मई तक सुझाव मांगे हैं, जिसके बाद आगे के नियम तय किए जाएंगे।