दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने 2020 में कोविड की शुरुआत के बाद इंटरेस्ट रेट्स घटाए थे। 2022 में इनफ्लेशन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया। केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट रेट्स बढ़ाने शुरू किए। अब इनफ्लेशन 2022 के अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे आ गया है। हालांकि, यह अब भी कई केंद्रीय बैंकों के टारगेट से ज्यादा है। अमेरिका में फेडरल रिजर्व इनफ्लेशन का टारगेट 2 फीसदी रखा है। वहां इनफ्लेशन 3 फीसदी से ज्यादा है। इंडिया में आरबीआई ने रिटेल इनफ्लेशन का टारगेट 4 फीसदी रखा है। मार्च 2024 में यह 4.85 फीसदी था।
दूसरी छमाही में इंटरेस्ट रेट घटने की उम्मीद
रिकॉर्ड ऊंचाई से काफी नीचे आ जाने के बाद इंटरेस्ट रेट में कमी का सिलसिला शुरू होने का अनुमान है। केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट में कमी के लिए सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। जहां तक RBI का सवाल है तो इस साल की दूसरी छमाही में केंद्रीय बैंक के इंटरेस्ट रेट घटाने की उम्मीद है। आरबीआई इनफ्लेशन, जीडीपी ग्रोथ और करेंसी रेट को देखने के बाद इंटरेस्ट रेट में कमी करने का फैसला लेगा।
फेडरल रिजर्व के फैसले का पड़ेगा असर
इंटरेस्ट रेट में कमी के लिए रिटेल इनफ्लेशन का 4 फीसदी या इस स्तर के करीब आना जरूरी है। इस वित्त वर्ष में इनफ्लेशन 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है। यह 4 फीसदी के करीब है। दूसरा, दुनिया खासकर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी का असर आरबीआई पर पड़ेगा। इससे आरबीआई का विश्वास बढ़ेगा कि इससे इंडिया में इंटरेस्ट रेट में कमी की वजह से विदेशी फंड अपना पैसा निकालकर अमेरिका नहीं ले जाएंगे।
कुछ केंद्रीय बैंकों ने घटाए हैं इंटरेस्ट
दुनिया में कुछ केंद्रीय बैंकों ने इंटरेस्ट रेट्स घटाए हैं। ब्राजील के केंद्रीय बैंक ने इंटरेस्ट रेट घटाया है। विकसित देशों में स्विस नेशनल बैंक ने इंटरेस्ट रेट में कमी की है। स्विट्जरलैंड में कोविड के दौरान ग्रोथ घटने पर केंद्रीय बैंक ने इंटरेस्ट घटाकर निगेविट कर दिया था। बाद में वहां ओवरनाइट रेट बढ़ाकर 1.75 कर दिया गया। अब स्विस केंद्रीय बैंक ने पॉलिसी रेट घटाकर मार्च 2024 में 1.5 फीसदी कर दिया है। यह स्विट्जरलैंड में बीते 9 साल में इंटरेस्ट रेट में पहली कमी है।
अमेरिका में इनफ्लेशन और घटने का इंतजार
दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की नजरें फेडरल रिजर्व पर लगी हैं। इसके बाद यूरोपीय सेंट्रल बैंक के रूख पर उनकी नजरें होंगी। अमेरिका में मार्च में सीपीआई इनफ्लेशन 3.5 फीसदी था। इसके मुकाबले फेडरल रिजर्व का पर्नसल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (पीसीई) इनफ्लेशन साल दर साल आधार पर बढ़कर मार्च में 2.7 फीसदी पहुंच गया। इससे इनफ्लेशन में कमी की उम्मीदों को थोड़ा झटका लगा है।
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जून में आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक
पहले अमेरिका में इस साल मार्च में फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट घटाने की उम्मीद लगाई गई थी। बाद में इस जून कर दिया गया। अब सितंबर में अमेरिका में इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद जताई जा रही है। इस बीच, यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने इस साल जून में होने वाली मीटिंग में इंटरेस्ट रेट में कमी होने की उम्मीद जताई है। जहां तक आरबीआई का सवाल है तो जून में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक होने वाली है। तब तक अप्रैल में सीपीआई इनफ्लेशन के आंकड़े जारी हो जाएंगे। मई के इनफ्लेशन के डेटा 12 जून को आएंगे। साथ ही मानसून की बारिश के बारे में भी अंदाजा मिल जाएगा।