सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बैंक की तरफ से एंप्लॉयीज को दिए गए इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाले लोन पर टैक्स लगेगा। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसे लोन को फ्रिंज बेनेफिट माना है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लाखों बैंक एंप्लॉयीज के लिए काफी अहम है। उन्हें इससे बड़ा झटका लगेगा। फ्रिंज बेनेफिट का मतलब ऐसे अतिरिक्त फायदों और सुविधाओं से है, जो कोई कंपनी एंप्लॉयीज को सैलरी के अलावा देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
कई एंप्लॉयर बेहतर काम के एवज में एंप्लॉयीज को खास सुविधाएं देते हैं। देश की सबसे बड़ी अदालत ने बैंक एंपलॉयीज को मिलने वाले टैक्स-फ्री या रियायती दर वाले लोन को इसी तरह की सुविधा माना है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि बैंक अगर अपने एंप्लॉयीज को कम इंटरेस्ट रेट या जीरो इंटरेस्ट रेट पर लोन देता है तो यह बैंक में एंप्लॉयीज को मिलने वाला अतिरिक्त बेनेफिट है। इसलिए इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाले लोन का फायदा उठाने वाले एंप्लॉयी को इस पर टैक्स चुकाना होगा।
बैंकों के स्टाफ यूनियंस की तरफ से अपील की गई थी
बैंक एंप्लॉयीज को इंटरेस्ट-फ्री लोन पर टैक्स के मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजीव खन्ना और दीपांकर दत्ता ने यह फैसला दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह बेनेफिट बैंक एंप्लॉयीज को सेवाओं के बदले में मिलने वाली सैलरी से अलग है। इसकी वजह यह है कि ह सुविधा सिर्फ उन लोगों को मिलती है जो कंपनी की तरफ से एंप्लॉयड किए जाते हैं। बैंकों की कई स्टाफ यूनियन और ऑफिसर्स यूनियंस ने टैक्स के नियम को लेकर अपील की थी।
स्टेट बैंक के इंटरेस्ट रेट को बेंचमार्क मानने में खराबी नहीं
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि एंप्लॉयर का इंटरेस्ट-फ्री या रियायती लोन का प्रोविजन फ्रिंज बेनेफिट के तहत आता है। कोर्ट ने इस मामले में इनकम टैक्स के नियम को सही बताया। कोर्ट ने यह भी कहा कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के इंटरेस्ट रेट को बेंचमार्क मानने में कोई खराबी नहीं है।
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इनकम टैक्स का नियम क्या कहता है?
इनकम टैक्स के नियम में कहा गया है कि बैंक की तरफ से एंलॉयीज को दिया गया इंटरेस्ट-फ्री या कम इंटरेस्ट रेट वाला लोन टैक्स के दायरे में आता है। अगर बैंक स्टेट बैंक के प्राइम लेंडिंग रेट से कम इंटरेस्ट रेट लेता है तो यह फ्रिंज बेनेफिट के दायरे में आएगा।