UPI, कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड होने पर मिलेगा मुआवजा, डिजिटल फ्रॉड पर RBI हुआ सख्त, लागू होंगे नए नियम

डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी ग्राहक के साथ डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड में 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है

अपडेटेड Mar 09, 2026 पर 12:49 PM
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डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट बढ़ने के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक ग्राहकों को राहत देने के लिए नए नियमों का प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के मुताबिक अगर किसी ग्राहक के साथ डिजिटल बैंकिंग फ्रॉड में 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है, तो उसे आंशिक मुआवजा मिल सकता है। इसके साथ ही RBI ने यह भी साफ किया है कि किन मामलों में बैंक जिम्मेदार होगा, कब ग्राहक की गलती मानी जाएगी और फ्रॉड होने पर शिकायत कैसे करनी होगी। अगर ये नियम लाए जाते हैं तो 1 जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं।

किन ट्रांजेक्शन पर लागू होंगे नियम

RBI के प्रस्ताव के मुताबिक ये नियम उन सभी डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लागू होंगे जो UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या एटीएम के जरिए किए जाते हैं। यानी अगर इन माध्यमों से कोई अनधिकृत ट्रांजेक्शन होता है तो ग्राहक को सुरक्षा मिल सकती है। हालांकि ये नियम फिलहाल कमर्शियल बैंकों पर लागू होंगे। छोटे वित्तीय बैंक, पेमेंट बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इस दायरे में शामिल नहीं होंगे।


फ्रॉड होने पर कितना मिलेगा मुआवजा

अगर किसी ग्राहक के साथ डिजिटल फ्रॉड होता है और नुकसान 50,000 रुपये तक का है, तो उसे मुआवजा मिल सकता है। प्रस्ताव के अनुसार ग्राहक को कुल नुकसान का 85% या अधिकतम 25,000 रुपये तक का पेमेंट किया जा सकता है। लेकिन यह सुविधा जीवन में केवल एक बार मिलेगी। इसके लिए जरूरी है कि ग्राहक फ्रॉड की जानकारी समय पर दे।

कौन से ट्रांजेक्शन माने जाएंगे अधिकृत

RBI के अनुसार अगर ग्राहक खुद OTP, PIN, पासवर्ड या कार्ड डिटेल्स डालकर पेमेंट करता है तो उसे अधिकृत ट्रांजेक्शन माना जाएगा। हालांकि अगर कोई व्यक्ति धोखे से ग्राहक की जानकारी हासिल कर ले या किसी को झांसा देकर पैसे ट्रांसफर करवा ले, तो ऐसे मामलों को फ्रॉड ट्रांजेक्शन माना जा सकता है।

बैंक की गलती और ग्राहक की गलती

ड्राफ्ट नियमों में यह भी बताया गया है कि किस स्थिति में जिम्मेदारी बैंक की होगी और कब ग्राहक की। अगर बैंक की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है, ट्रांजेक्शन अलर्ट नहीं भेजे जाते या फ्रॉड की शिकायत करने का सही तरीका उपलब्ध नहीं है, तो इसे बैंक की लापरवाही माना जा सकता है।

वहीं अगर ग्राहक खुद OTP, पासवर्ड या कार्ड डिटेल्स किसी के साथ शेयर करता है, बैंक की चेतावनी को नजरअंदाज करता है या किसी संदिग्ध ऐप को डाउनलोड करता है, तो इसे ग्राहक की लापरवाही माना जा सकता है।

थर्ड पार्टी की गलती भी हो सकती है कारण

कुछ मामलों में समस्या बैंक या ग्राहक की नहीं बल्कि किसी तीसरे पक्ष की भी हो सकती है। उदाहरण के लिए पेमेंट गेटवे, थर्ड पार्टी ऐप, टेलीकॉम कंपनी या पेमेंट एग्रीगेटर की तकनीकी समस्या के कारण भी फ्रॉड हो सकता है। ऐसे मामलों को थर्ड-पार्टी ब्रीच माना जाएगा।

फ्रॉड होने पर तुरंत करें शिकायत

RBI ने ग्राहकों को सलाह दी है कि अगर कोई संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखे तो तुरंत बैंक को जानकारी दें। साथ ही नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें। मुआवजा पाने के लिए जरूरी है कि ग्राहक पांच दिन के अंदर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों जगह शिकायत दर्ज कराए।

छोटे फ्रॉड मामलों में खास सिस्टम

छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में मुआवजे का बड़ा हिस्सा RBI की तरफ से दिया जा सकता है, जबकि कुछ हिस्सा ग्राहक के बैंक और पैसे पाने वाले बैंक से भी आएगा। अगर बाद में चोरी हुआ पैसा वापस मिल जाता है तो मुआवजे की अमाउंट उसी हिसाब से एडजस्ट किया जाएगा।

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