क्या आपने रिटायरमेंट बाद के अपने खर्च का हिसाबकिताब लगा लिया है? अगर नहीं तो यह काम आपको जल्द कर लेना चाहिए। व्यक्ति अगर 60 साल की उम्र में रिटायर कर रहा है तो उसे अगले 25 सालों के अपने खर्च का कैलकुलेशन करना ठीक रहेगा। इस कैलकुलेशन में आपको इनफ्लेशन के असर का खास ध्यान रखना होगा। कई लोग यह नहीं समझते कि आपके पैसे की वैल्यू हर साल घटती जाती है। आज एक लाख रुपये की जो वैल्यू है, पांच साल बाद वह काफी कम हो जाएगी। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ जा सकता है।
मान लीजिए 60 साल की उम्र में किसी व्यक्ति का महीने का खर्च 1 लाख रुपये है। इसका मतलब है कि पहले साल में उसे 12 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। उसके पास 3 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड (Retirement Fund) है। यह सिर्फ एक उदाहरण है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आपको रिटायरमेंट के बाद हर महीने खर्च के लिए कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी और आपके रिटायरमेंट कॉपर्स की ग्रोथ क्या होनी चाहिए?
दूसरे साल से हर महीने खर्च का अमाउंट बढ़ने लगेगा
यह साफ है कि आपको अगले 25 साल तक हर महीने 1 लाख रुपये की जरूरत पड़ने वाली है। अब इसमें इनफ्लेशन का ध्यान रखना होगा। हम सालाना 4 फीसदी इनफ्लेशन मान लेते हैं। साथ ही आपका 3 करोड़ रुपये के रिटायरमेंट फंड का रिटर्न सालाना 8 फीसदी, 10 फीसदी या 12 फीसदी रह सकता है। यह इस पर निर्भर करेगा कि आपने यह पैसा कहां निवेश किया है।
मासिक खर्च के अमाउंट पर ऐसे पड़ेगा इनफ्लेशन का असर
अब हम इनफ्लेशन के असर की बात करते हैं। पहले साल में आपको हर महीने एक लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। लेकिन, दूसरे साल से आपको हर महीने 1.04 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। इसकी वजह इनफ्लेशन है। 25वें साल में आपको हर महीने 2.67 लाख रुपये की जरूरत पड़ेगी। इसका मतलब है कि आपके मासिक खर्च पर इनफ्लेशन का कंपाउंडिंग असर पड़ेगा। इसलिए, आपको अपने इनवेस्टमेंट फंड को सही जगह निवेश करना बहुत जरूरी है। आपके इनवेस्टमेंट फंड का रिटर्न कम से कम इनफ्लेशन के रेट से ज्यादा होना चाहिए।
रिटायरमेंट फंड के निवेश में इन बातों का रखना होगा ध्यान
रिटायरमेंट फंड के निवेश में आपको एसेट ऐलोकेशन का ध्यान रखना होगा। आपका इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो डायवर्सिफायड होना चाहिए। इसका मतलब यह है कि इसमें शेयर, बॉन्ड्स और दूसरे इंस्ट्रूमेंट्स शामिल होने चाहिए। इससे आपके रिटायरमेंट फंड का सालाना रिटर्न 8 फीसदी, 10 फीसदी या 12 फीसदी हो सकता है। अगर आप निवेश में बिल्कुल रिस्क नहीं लेना चाहते हैं तो आपका सालाना रिटर्न 8 फीसदी रह सकता है। अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो रिटर्न 10 फीसदी रह सकता है। ज्यादा रिस्क लेने पर 12 फीसदी रिटर्न मिल सकता है।
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खर्च और इनवेस्टमेंट के रिटर्न में संतुलन बनाए रखें
इस तरह सही प्लानिंग से आपको रिटायरमेंट के बाद जरूरी खर्चों के लिए पैसे की कमी नहीं होगी। आपका रिटायरमेंट फंड आपके अगले 25 साल के खर्च के लिए पर्याप्त होगा। आपको सिर्फ इस बात का ध्यान रखना होगा कि आपको हर महीने जितने पैसों की जरूरत है, उसके हिसाब से आपके रिटायरमेंट फंड का सालाना रिटर्न होना चाहिए। कई लोग रिटायरमेंट के बाद इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं। इससे कुछ ही साल बाद उन्हें पैसे की कमी होने लगती है। अगर आपको इस प्लानिंग में दिक्कत आ रही है तो आप किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद ले सकते हैं।