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डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी, जानिए यह कैसे आपकी जेब पर डाल सकता है असर

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी का असर विदेशी यात्रा, विदेश में पढ़ाई, विदेश में इलाज जैसे खर्चों पर भी पड़ेगा। इसके अलावा इंडिया में उन चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिनका हम आयात करते हैं। दलहन, खाद्य तेल सहित रोजमर्रा की चीजों का इंडिया आयात करता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Dec 20, 2024 पर 2:41 PM
डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी, जानिए यह कैसे आपकी जेब पर डाल सकता है असर
आयात की कॉस्ट बढ़ने का असर प्रोडक्ट्स की खुदरा कीमतों पर पड़ता है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी है। 20 दिसंबर को रुयया गिरकर 85.10 के लेवल पर आ गया। डॉलर के मुकाबले रुपये का कमजोर होना सिर्फ सरकार और आरबीआई के लिए चिंता की बात नहीं है बल्कि यह आम आदमी के लिए भी मुश्किल पैदा कर सकता है। इसकी वजह यह है कि इसका असर विदेशी यात्रा, विदेश में पढ़ाई, विदेश में इलाज जैसे खर्चों पर भी पड़ेगा। इसके अलावा इंडिया में उन चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिनका हम आयात करते हैं। दलहन, खाद्य तेल सहित रोजमर्रा की चीजों का इंडिया आयात करता है। इसके अलावो गोल्ड और फ्यूल का भी इंपोर्ट होता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

ये चीजें हो जाएंगी महंगी

आयात (import) की कॉस्ट बढ़ने का असर प्रोडक्ट्स की खुदरा कीमतों पर पड़ता है। खासकर दलहन (Pulses), खाद्य तेल (Edible Oil) और फल (Fruits) जैसी रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ने का असर इनफ्लेशन पर पड़ता है। इसके अलावा ऐसे उद्योग हैं, जिसमें उत्पादन के लिए कच्चे माल का आयात करना पड़ता है। कच्चे माल के आयात का खर्च बढ़ने का असर प्रोडक्ट्स की रिटेल कीमतों पर पड़ता है। इससे भी इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ जाता है। इंडिया क्रूड की अपनी जरूरत के काफी ज्याद हिस्से का आयात करता है। क्रूड का आयात खर्च एक सीमा से ज्यादा होने पर सरकार इसका बोझ ग्राहकों पर डालती है। इससे पेट्रोल, डीजल और एलएनजी की कीमतें बढ़ जाती हैं।

विदेश में पढ़ाई, इलाज का खर्च बढ़ेगा

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