सहारा समूह की योजनाओं में पैसा लगाने वाले निवेशकों को राहत! अब मिलेंगे 50,000 रुपये

सहारा समूह में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए राहत की खबर है। अबर सरकार 10,000 रुपये की जगह 50,000 रुपये वापिस करेगी। सरकार ने पैसे की लिमिट बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी है। ऐसे में जिन लोगों ने सहारा की स्कीमों में ज्यादा पैसा लगाया था, उन्हे थोडी राहत जरूर मिलेगी

अपडेटेड Sep 18, 2024 पर 7:37 PM
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सहारा समूह में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए राहत की खबर है।

सहारा समूह में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए राहत की खबर है। अबर सरकार 10,000 रुपये की जगह 50,000 रुपये वापिस करेगी। सरकार ने पैसे की लिमिट बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी है। ऐसे में जिन लोगों ने सहारा की स्कीमों में ज्यादा पैसा लगाया था, उन्हे थोडी राहत जरूर मिलेगी। सरकार ने सहारा समूह सहकारी समितियों के छोटे जमाकर्ताओं के लिए वापस की जाने वाले अमाउंट की लिमिट को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया है। सहकारिता मंत्रालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

अब मिलेंगे 50,000 रुपये

सरकार ने अब तक सीआरसीएस (सहकारी समितियों के केंद्रीय पंजीयक)-सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से सहारा समूह की सहकारी समितियों के 4.29 लाख से अधिक जमाकर्ताओं को 370 करोड़ रुपये जारी किए हैं। अधिकारी ने कहा कि रिफंड राशि की सीमा 50,000 रुपये तक बढ़ने से अगले 10 दिन में लगभग 1,000 करोड़ रुपये का पेमेंट किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले हफ्ते छोटे इन्वेस्टर के लिए ‘रिफंड’ अमाउंट की लिमिट 10,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई थी।


सरकार कर रही है पूरी जांच

सरकार ‘रिफंड’ जारी करने से पहले जमाकर्ताओं के दावों की सावधानीपूर्वक जांच कर रही है। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद सहारा समूह की चार बहु-राज्य सहकारी समितियों के वास्तविक जमाकर्ताओं की वैलिड जमा अमाउंट की वापसी के दावे प्रस्तुत करने के लिए सीआरसीएस-सहारा रिफंड पोर्टल 18 जुलाई 2023 को पेश किया गया था।ये सहमारी समितियां हैं... सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लि., लखनऊ, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसायटी लि., भोपाल, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लि., कोलकाता और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, हैदराबाद।

अदालत का फैसला

न्यायालय के 29 मार्च 2023 के आदेश के तहत 19 मई, 2023 को सेबी-सहारा रिफंड खाते से 5,000 करोड़ रुपये की राशि केंद्रीय सहकारी समितियों के पंजीयक (सीआरसीएस) को अलॉट की थी। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी डिजिटल तरीके से पैसे के डिस्ट्रीब्यूषन मामले की देख-रेख कर रहे हैं।

 

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