IMPS service charges: SBI ने ऑनलाइन IMPS ट्रांजैक्शन पर लगाया नया चार्ज, ₹25,000 से ऊपर के ट्रांसफर होंगे महंगे

IMPS service charges: देश के सबसे बड़े बैंक SBI ने ग्राहकों के लिए बड़ा बदलाव ला दिया है। अब 15 फरवरी 2026 से ऑनलाइन IMPS ट्रांजेक्शन पर 25,000 रुपये से ज्यादा की राशि पर सर्विस चार्ज देना पड़ेगा। पहले 5 लाख तक सभी ऑनलाइन IMPS फ्री थे, लेकिन अब इस सुविधा पर ब्रेक लग गया।

अपडेटेड Jan 16, 2026 पर 8:59 PM
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देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) अब अपने ग्राहकों के लिए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के नियमों में बदलाव करने जा रहा है। बैंक ने घोषणा की है कि वह जल्द ही IMPS (Immediate Payment Service) के जरिए किए जाने वाले ऑनलाइन ट्रांजैक्शन पर सर्विस चार्ज लगाएगा। यह चार्ज केवल उन ट्रांजैक्शनों पर लागू होगा जो ₹25,000 से अधिक होंगे।

क्या है नया नियम?

अब तक SBI में IMPS के जरिए ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर करने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता था। लेकिन नए नियम के तहत अगर कोई ग्राहक ₹25,000 से ज्यादा की राशि ट्रांसफर करता है, तो उसे सर्विस चार्ज देना होगा। यह चार्ज ट्रांजैक्शन की राशि के हिसाब से तय होगा।

कितना देना होगा चार्ज?


- ₹25,000 से ₹1 लाख तक के ट्रांजैक्शन पर ₹10 + GST

- ₹1 लाख से ₹2 लाख तक के ट्रांजैक्शन पर ₹20 + GST

- ₹2 लाख से ₹5 लाख तक के ट्रांजैक्शन पर ₹25 + GST

इस तरह, जितनी बड़ी राशि ट्रांसफर होगी, उतना ज्यादा चार्ज देना होगा।

ग्राहकों पर असर

SBI के करोड़ों ग्राहक रोजाना IMPS का इस्तेमाल करते हैं। खासकर छोटे बिजनेस और आम लोग, जो तुरंत पैसे भेजने की सुविधा चाहते हैं, उनके लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है। हालांकि, बैंक का कहना है कि यह चार्ज बहुत मामूली है और ग्राहकों पर ज्यादा बोझ नहीं डालेगा।

क्यों लगाया गया चार्ज?

बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि SBI ने यह कदम डिजिटल ट्रांजैक्शन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए उठाया है। IMPS एक रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम है, जिसमें बैंक को तकनीकी और नेटवर्किंग खर्च उठाना पड़ता है। नए चार्ज से बैंक को इन खर्चों को मैनेज करने में मदद मिलेगी। SBI के 50 करोड़+ ग्राहक रोज IMPS इस्तेमाल करते हैं। फ्री सर्विस से लोड बढ़ रहा था। अब बड़े ट्रांजेक्शन पर चार्ज से कॉस्ट रिकवर होगी। अन्य बैंक (HDFC, ICICI) भी इसी फॉर्मूले पर हैं। RBI गाइडलाइंस के तहत IMPS चार्ज वैकल्पिक हैं। ग्राहक NEFT/RTGS या UPI (फ्री) चुन सकते हैं। SBI का यह कदम डिजिटल बैंकिंग को रेगुलेटेड बनाने की दिशा में है।

ग्राहकों के लिए विकल्प

अगर ग्राहक चार्ज से बचना चाहते हैं, तो वे NEFT (National Electronic Funds Transfer) या RTGS (Real Time Gross Settlement) का इस्तेमाल कर सकते हैं। इन सेवाओं पर फिलहाल कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। इसके अलावा, UPI ट्रांजैक्शन भी अभी मुफ्त हैं, जो छोटे और मध्यम ट्रांसफर के लिए सबसे आसान विकल्प है।

ग्राहकों के लिए सलाह

25,000 से कम रखें या UPI इस्तेमाल करें

सैलरी अकाउंट में शिफ्ट करें

महीने के अंत में IMPS चार्ज चेक करें

YONO प्रीमियम सब्सक्रिप्शन लें (चार्ज वेवर)

SBI का यह नया नियम डिजिटल बैंकिंग के दौर में ग्राहकों के लिए एक अहम बदलाव है। जहां एक ओर यह बैंक को तकनीकी खर्चों को मैनेज करने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को अब बड़े ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त रकम चुकानी होगी। समझदारी इसी में है कि ग्राहक अपनी जरूरत और ट्रांजैक्शन की राशि के हिसाब से सही विकल्प चुनें।

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