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चुनावी नतीजों के बाद क्या निवेशकों को सेक्टोरल और थिमैटिक फंड में निवेश में सावधानी बरतनी चाहिए?

लोकसभा चुनावों के नतीजों के बाद सरकार की पॉलिसी में बदलाव आ सकता है। इसकी सीधा असर सेक्टोरल फंड या थिमैटिक फंड पर पड़ सकता है। कुछ सेक्टर का अट्रैक्शन बढ़ सकता है कुछ का घट सकता है। ऐसे में निवेशकों को ऐसे फंड में निवेश करने में सावधानी बरतने की जरूरत है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 06, 2024 पर 6:19 PM
चुनावी नतीजों के बाद क्या निवेशकों को सेक्टोरल और थिमैटिक फंड में निवेश में सावधानी बरतनी चाहिए?
निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि सेक्टोरल और थिमैटिक दोनों ही फंड में काफी रिस्क है।

लोकसभा चुनावों के नतीजों का सेक्टोरल और थिमैटिक फंडों पर असर पड़ सकता है। इसकी वजह है कि राजनीतिक दलों की इकोनॉमी की ग्रोथ को लेकर अलग-अलग स्ट्रेटेजी होती है। इसलिए नई सरकार का असर कुछ खास सेक्टर या थीम पर पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने जा रही है। नई सरकार का फोकस निवेश आधारित इकोनॉमिक ग्रोथ पर रहने की उम्मीद है। हालांकि, सरकार की मौजूदा पॉलिसी में थोड़ा बदलाव हो सकता है।

मार्केट सेटिंमेंट का फंड्स पर असर

सेक्टोरल (Sectoral Fund) और थिमैटिक फंड्स (Thematic Funds) रिटेल इनवेस्टर्स के लिए नहीं होते हैं। फिर भी, इनमें निवेश करने वाले रिटेल निवेशकों को इस बात का आकलन करने की जरूरत है कि चुनावी नतीजों का असर उन सेक्टर या थिमैटिक फंडों पर क्या असर पड़ेगा, जिनमें उन्होंने निवेश किया है। 4 जून को Sensex और Nifty में करीब 6 फीसदी की गिरावट आई। इसकी वजह यह थी कि BJP को अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिली थी। हालांकि, अगले दो दिनों में मार्केट में रिकवरी दिखी।

यह गिरावट बुल मार्केट का अंत नहीं

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