Sensex, Nifty में उतार-चढ़ाव से क्या आप भी अपना सिप बंद करने के बारे में सोच रहे हैं? अगर हां तो पहले ये बातें जान लें

मध्यपूर्व में लड़ाई का असर शेयर बाजार पर पड़ा है। भारतीय बाजार में तो बीते 10 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट आई है। बाजार में सबसे ज्यादा डर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से है। 9 मार्च को क्रूड ऑयल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि, बाद में यह गिरकर फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया

अपडेटेड Mar 10, 2026 पर 12:08 PM
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सेंसेक्स और निफ्टी में 5 जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है।

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है। ज्यादातर इनवेस्टर्स के पोर्टफोलियो में 28 फरवरी के बाद से गिरावट बढ़ी है। हर कुछ साल बाद शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है। फिर तेजी आती है और इनवेस्टर्स को अच्छा प्रॉफिट होता है। लंबी अवधि में शेयर बाजार के प्रदर्शन को देखने से इसकी पुष्टि होती है।

क्रूड में उछाल से शेयर बाजार में बढ़ा डर

मध्यपूर्व में लड़ाई का काफी असर शेयर बाजार पर पड़ा है। भारतीय बाजार में तो बीते 10 महीनों की सबसे बड़ी गिरावट आई है। बाजार में सबसे ज्यादा डर क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से है। 9 मार्च को क्रूड ऑयल की कीमत 118 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि, बाद में यह गिरकर फिर से 90 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। क्रूड में उछाल की वजह इसकी सप्लाई में रुकावट है।


सेंसेक्स और निफ्टी 5 जनवरी के पीक से करीब 10 फीसदी नीचे

सेंसेक्स और निफ्टी में 5 जनवरी के रिकॉर्ड हाई से 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। हालांकि, 10 जनवरी को सेंसेक्स और निफ्टी अच्छी तेजी के साथ खुले। शेयर बाजार में हाल में आई गिरावट से सिप के निवेशक भी चिंतित हैं। कई इनवेस्टर्स तो अपना सिप बंद करने और पैसे निकालने के बारे में सोच रहे हैं। सवाल है कि क्या ऐसा करना ठीक रहेगा?

बीते 46 सालों में बाजार ने 37 सालों में दिया रिटर्न

फंड्सइंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट में गिरावट एक आम बात है। हालांकि, ज्यादातर इनवेस्टर्स इस बात को समझते नहीं हैं। 1980 से अब तक के 46 सालों में से 37 सालों में मार्केट ने पॉजिटिव रिटर्न दिया है। लेकिन, शेयर बाजार के रिटर्न वाले सालों के बीच में गिरावट वाले साल भी रहे हैं। इससे यह पता चलता है कि शेयर बाजारों में तेजी के बीच गिरावट आम बात है।

2008 और 2020 मेंं आई थी बड़ी गिरावट

2014 में मार्केट में करीब 30 फीसदी तेजी आई थी। हालांकि, उस साल भी मार्केट में थोड़े समय के लिए गिरावट आई थी। बाजार में ज्यादातर करेक्शंस सामान्य रहे हैं। लेकिन, ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस सहित कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जब मार्केट में बड़ी गिरावट आई। 2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के समय सेंसेक्स अपने ऑल-टाइम हाई से 60 फीसदी से ज्यादा गिरा था। दुनियाभर के बाजारों में गिरावट आई थी। फिर 2020 में कोविड की महामारी के वक्त बाजार में बड़ी गिरावट आई।

2-3 साल में बाजार में आ जाती है रिकवरी

मार्केट में बड़ी गिरावट आने पर इनवेस्टर्स की चिंता बढ़ जाती है। कई इनवेस्टर्स पैसे निकालना शुरू कर देते हैं। लेकिन, सच यह है कि हर गिरावट के बाद मार्केट में रिकवरी आती है। बाजार के डेटा से पता चलता है कि ऑल-टाइम हाई से गिरावट और फिर रिकवरी में औसतन दो से तीन साल का समय लगता है। हालांकि, कई बार रिकवरी जल्द भी आती है। कोविड इसका उदाहरण है।

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क्या आपको अपना सिप बंद करना चाहिए?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार के उतार-चढ़ाव से लंबी अवधि के निवेशकों को परेशान नहीं होना चाहिए। इतिहास बताता है कि जियोपॉलिटिकल टेंशन बढ़ने या किसी दूसरी बड़ी घटना से बाजार गिरता है। फिर रिकवरी आती है। उसके बाद बाजार नया ऑल-टाइम हाई बनाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट की रिकवरी में अर्निंग्स ग्रोथ और इकोनॉमिक एक्टिविटी बढ़ने का हाथ होता है। इसलिए निवेशकों को अपना सिप बंद नहीं करना चाहिए।

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