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शेयर बायबैक के टैक्स के नए नियमों का असर शेयरहोल्डर्स और कंपनियों पर किस तरह पड़ेगा?

नए नियम में शेयरहोल्डर्स की टैक्स लायबिलिटी बढ़ गई है। कई शेयहोल्डर्स के लिए टैक्स रेट पहले कंपनियों की तरफ से चुकाए जाने वाले 23.29 फीसदी से ज्यादा हो गया है। इस वजह से ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले लोग शेयर बायबैक प्रोग्राम से दूरी बना सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 29, 2024 पर 5:28 PM
शेयर बायबैक के टैक्स के नए नियमों का असर शेयरहोल्डर्स और कंपनियों पर किस तरह पड़ेगा?
नए नियमों का असर कंपनियों पर भी पड़ेगा। अब कंपनियां शेयर बायबैक पर टैक्स पेमेंट के पैसे का इस्तेमाल दूसरी जगह कर सकती हैं।

शेयर बायबैक से जुड़े टैक्स के नए नियम 1 अक्टूबर से लागू हो गए हैं। नए नियमों का ऐलान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट में किया था। नए नियम में टैक्स का बोझ कंपनी की जगह अब शेयरहोल्डर्स पर आ गया है। अब शेयर बायबैक से होने वाले गेंस को डिविडेंड माना गया है। इसका मतलब है कि अब इस पर शेयरहोल्डर के टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा। पहले इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 115क्यूए के तहत कंपनी को टैक्स चुकाना पड़ता था। उसे करीब 23.29 फीसदी टैक्स देना पड़ता था।

टैक्स चुकाने की जिम्मेदारी शेयरहोल्डर्स पर 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए नियम में शेयरहोल्डर्स की टैक्स लायबिलिटी बढ़ गई है। कई शेयहोल्डर्स के लिए टैक्स रेट पहले कंपनियों की तरफ से चुकाए जाने वाले 23.29 फीसदी से ज्यादा हो गया है। सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब में आने वाले लोगों को शेयर बायबैक से होने वाले मुनाफे पर 30 फीसदी से ज्यादा टैक्स चुकाना होगा। इस वजह से ऐसे शेयरहोल्डर्स के लिए शेयर बायबैक का अट्रैक्शन खत्म हो गया है।

टैक्स की वजह से रिटर्न घट जाएगा

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