सोना खरीदें या बेचें? वैश्विक तनाव में नरमी के बीच क्या हो रणनीति, जानिए एक्सपर्ट से

Gold Price Update: अमेरिका-चीन तनाव में नरमी से सोने की कीमतों में गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमतें ₹90,000 तक गिर सकती हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में गोल्ड का आउटलुक मजबूत है। निवेशकों को धीरे-धीरे खरीदारी की सलाह।

अपडेटेड May 14, 2025 पर 2:38 PM
Story continues below Advertisement
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 12 मई को करीब 3% गिरकर एक महीने के निचले स्तर पर आ गई।

Gold Price Update: सोने की कीमतों में बीते कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव जारी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 999 प्योरिटी वाले 10 ग्राम फिजिकल गोल्ड की कीमत 9 मई को ₹96,416 थी, जो 12 मई को गिरकर ₹93,080 तक आ गई। हालांकि, 13 मई को यह फिर बढ़कर ₹94,344 पर पहुंच गई।

MCX पर भी जून गोल्ड फ्यूचर्स में तेजी दर्ज की गई, जो 12 मई को 3.79% की गिरावट के बाद ₹92,860 पर बंद हुए थे। 13 मई को इनमें 1.26% की तेजी रही और कीमत ₹94,070 तक पहुंच गई।

अमेरिका-चीन समझौते से घटी गोल्ड की चमक


Way2Wealth की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 12 मई को करीब 3% गिरकर एक महीने के निचले स्तर पर आ गई। इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ में 90 दिनों के लिए बड़ी कटौती पर बनी सहमति है। इस घटनाक्रम से निवेशक शेयर बाजार जैसी जोखिम वाली संपत्ति का रुख किया और सुरक्षित निवेश विकल्पों (safe-haven assets) की मांग कम हुई।

क्या सोने की कीमतों में आएगी और गिरावट?

Motilal Oswal Financial Services के रिसर्च हेड (कमोडिटीज एंड करंसीज) नवनीत दमानी ने कहा कि निकट भविष्य में सोने की कीमतों में और गिरावट मुमकिन है। उन्होंने बताया, “हमारा मानना अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और सस्ता होगा। घरेलू स्तर पर भी कीमतें ₹90,000–₹91,000 के स्तर तक आ सकती हैं, खासकर भारत-पाकिस्तान सीमा पर तनाव कम होने की वजह से।”

Way2Wealth के टेक्निकल एनालिसिस के अनुसार, MCX गोल्ड में निकट अवधि में अस्थिरता बनी रह सकती है। फिलहाल इसमें ₹92,200 पर सपोर्ट और ₹97,000 पर रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।

लॉन्ग टर्म आउटलुक बना मजबूत

दूसरी ओर, कई एक्सपर्ट मानते हैं कि मौजूदा गिरावट के बावजूद सोने को लेकर लंबी अवधि में नजरिया पॉजिटिव है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की वाइस प्रेसिडेंट अक्षा कंबोज ने कहा, “अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भले ही मुद्रास्फीति में नरमी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बेहतर संकेतों से थोड़ी गिरावट आई हो, लेकिन सेंट्रल बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और ब्याज दर में संभावित कटौती लंबी अवधि में गोल्ड में तेजी को सपोर्ट दे रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत में आगामी त्योहारों और शादियों के सीजन को देखते हुए घरेलू मांग स्थिर बनी हुई है। ऐसे में आने वाले कुछ तिमाहियों में कीमतें स्थिर से लेकर मजबूत बनी रह सकती हैं।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

एक्सपर्ट का मानना है कि रिटेल इन्वेस्टर्स को सोने को लॉन्ग टर्म एसेट के रूप में देखना चाहिए, न कि फौरन मुनाफा देने वाले साधन के तौर पर। अक्षा कंबोज ने कहा, “मौजूदा गिरावट लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स के लिए धीरे-धीरे खरीदारी का मौका हो सकती है।”

दमानी ने भी निवेशकों को सलाह दी कि वे ₹90,000 के करीब कीमत आने पर निवेश पर विचार करें और साथ ही सिल्वर को भी पोर्टफोलियो में शामिल करें, क्योंकि आने वाले दिनों में इसमें बेहतर रिटर्न की संभावना है।

फाइनेंशियल एडवाइजर्स की सामान्य राय है कि पोर्टफोलियो में 10–15% हिस्सा गोल्ड का होना चाहिए। निवेश का फैसला मूल्य उतार-चढ़ाव पर नहीं, बल्कि आपकी ओवरऑल फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित होना चाहिए।

यह भी पढ़ें : Gold Rate Today: क्या गोल्ड में तेजी का दौर खत्म हो चुका है?

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।