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Gold Investment: सोने में बंपर रिटर्न का सच, क्या अब लॉन्ग टर्म के लिए दांव लगाने पर होगा नुकसान?

Gold Investment: सोने की कीमतों में हालिया तेजी के बावजूद, वैल्यू रिसर्च रिपोर्ट निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह देती है। जानिए लंबे समय में सोना अक्सर कम रिटर्न क्यों देता है और निवेशकों को करना चाहिए।

Suneel Kumarअपडेटेड Jul 02, 2025 पर 4:07 PM
Gold Investment: सोने में बंपर रिटर्न का सच, क्या अब लॉन्ग टर्म के लिए दांव लगाने पर होगा नुकसान?
वैल्यू रिसर्च का सुझाव है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का सिर्फ 5 से 10 फीसदी हिस्सा ही सोने में लगाना चाहिए।

Gold Investment: हाल के महीनों में सोने की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। बीते 12 महीनों में यह करीब 47 फीसदी तक उछला है। लेकिन वैल्यू रिसर्च (Value Research) की ताजा रिपोर्ट एक अहम चेतावनी देती है। सोने का प्रदर्शन हमेशा ऐसा नहीं रहता। ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि यह धातु लंबे समय तक बहुत कम या शून्य रिटर्न भी दे सकती है। यही वजह है कि एक्सपर्ट इसे 'ग्रोथ असेट' नहीं बल्कि 'रिस्क मैनेजमेंट टूल' के रूप में देखने की सलाह दे रहे हैं।

सात-सात साल तक नहीं मिला मुनाफा

वैल्यू रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर 1979 से मार्च 1980 के बीच सोने की कीमतें सिर्फ छह महीनों में ₹75 से ₹163 प्रति ग्राम पहुंच गई थीं। लेकिन इसके बाद सोना सात साल तक कोई नया ऊंचा स्तर नहीं छू सका। इसी तरह 1995 से 2000 के बीच इसमें सालाना औसतन सिर्फ 0.7% की बढ़त हुई। और जनवरी 2012 से नवंबर 2018 तक, लगभग सात वर्षों तक कीमतें एक ही दायरे में बनी रहीं।

सोना शेयर बाजार जैसा नहीं होता

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