चांदी में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है। चांदी का इस्तेमाल कई तरह की इंडस्ट्री में होता है। इससे इसकी डिमांड बढ़ रही है, जिसका असर इसकी कीमतों पर पड़ रहा है। 2024 में चांदी की सप्लाई डिमांड के मुकाबले कम रही। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के उत्पादन में चांदी का इस्तेमाल हो रहा है।
चांदी में 15-20 फीसदी उछाल आ सकता है
एक्सपर्ट्स का कहना है कि Gold के मुकाबले Silver की वैल्यूएशन कम है। इसका पता गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो से मिलता है। ऐतिहासिक रूप से इसका औसत रेशियो 68 रहा है। लेकिन, अभी करीब 90 पहुंच गया है। इसका मतलब है कि चांदी की वैल्यूएशन सोने के मुकाबले कम है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर गोल्ड की कीमतों में स्थिरता आती है तो चांदी में 15-20 फीसदी उछाल दिख सकता है।
बीते एक साल में चांदी ने दिया 27 फीसदी रिटर्न
बीते एक साल में जहां सोने ने 32 फीसदी रिटर्न दिया है वही चांदी का रिटर्न 27 फीसदी रहा है। अगर पांच साल की बात करें तो इस दौरान सोने का CAGR रिटर्न 11 फीसदी रहा है, जबकि चांदी का 9 फीसदी रहा है। सिल्वर इनवेस्टमेंट पोर्टोफोलियो के डायवर्सिफिकेशन में भी मदद करता है। इनवेस्टर्स चांदी पर दांव लगाने के लिए सिल्वर ईटीएफ या सिल्वर ईटीएफ एफओएफ में इनवेस्ट कर सकते हैं।
सिल्वर ईटीएफ और सिल्वर एफओएफ में फर्क
सिल्वर ईटीएफ ऐसा फंड है, जो सीधे फिजिकल सिल्वर में इनवेस्ट करता है। इस फंड के यूनिट्स की ट्रेडिंग शेयरों की तरह स्टॉक एक्सचेंजों में होती है। हालांकि, सिल्वर ईटीएफ में इनवेस्ट करने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी है। सिल्वर एफओएफ कई सिल्वर ईटीएफ में इनवेस्ट करता है। सिल्वर एफओएफ में निवेश करने के लिए डीमैट अकाउंट जरूरी नहीं है। हालांकि, सिल्वर एफओएफ का एक्सपेंस रेशियो थोड़ा ज्यादा है। इसका एक्सपेंस रेशियो 0.70 से 0.96 फीसदी के बीच है, जबकि सिल्वर ईटीएफ का 0.40 से 0.56 फीसदी के बीच है।
सिल्वर ईटीएफ के टैक्स के नियम
सिल्वर ईटीएफ और सिल्वर एफओएफ के टैक्स के नियमों को भी समझ लेना जरूरी है। सिल्वर ईटीएफ को 12 महीने के बाद बेचने पर हुए कैपिटल गेंस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। इस पर 12.5 फीसदी रेट से टैक्स लगेगा। 12 महीने से पहले बेचने पर हुए गेंस को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।
सिल्वर एफओएफ के टैक्स के नियम
सिल्वर एफओएफ के लिए टैक्स के नियम अलग है। इसे 24 महीने के बाद बेचने पर हुए गेंस को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। उस पर 12.5 फीसदी के रेट से टैक्स लगेगा। 24 महीने से पहले बेचने पर उसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस माना जाएगा। उस पर टैक्सपेयर के स्लैब के रेट के हिसाब से टैक्स लगेगा। जिन निवेशकों के पास डीमैट अकाउंट है, वे सिल्वर ईटीएफ में इनवेस्ट कर सकते हैं।