Silver Import Ban: सरकार ने इंपोर्ट पर बढ़ाई सख्ती, क्या और बढ़ने वाली हैं चांदी की कीमतें?

Silver Import Ban: भारत सरकार ने चांदी के इंपोर्ट नियम सख्त कर दिए हैं। कई तरह की सिल्वर अब सरकारी मंजूरी के बिना इंपोर्ट नहीं हो सकेगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सप्लाई पर दबाव बढ़ने से भारत में चांदी की कीमतें ग्लोबल बाजार से ज्यादा तेजी से बढ़ सकती हैं। जानिए डिटेल।

अपडेटेड May 17, 2026 पर 10:15 PM
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भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में चांदी विदेशों से खरीदता है।

Silver Import Ban: भारत सरकार ने चांदी के इंपोर्ट को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। सरकार ने चांदी की कई कैटेगरी को 'फ्री' इंपोर्ट लिस्ट से हटाकर 'रिस्ट्रिक्टेड' कैटेगरी में डाल दिया है। यानी अब कई तरह की चांदी बिना सरकारी मंजूरी के इंपोर्ट नहीं की जा सकेगी।

यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले ही सरकार ने सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दी थी।

सरकार यह कदम क्यों उठा रही


ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा हुआ है। सरकार चाहती है कि डॉलर कम से कम देश से बाहर जाए। इसी वजह से इंपोर्ट पर सख्ती बढ़ाई जा रही है।

कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी, ताकि गोल्ड इंपोर्ट कम हो और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटे।

किन तरह की चांदी पर सख्ती बढ़ी

नए नियमों के तहत अब 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाली सिल्वर बार, सेमी-मैन्युफैक्चर्ड सिल्वर और पाउडर फॉर्म में चांदी के इंपोर्ट के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी होगी।

सरकार ने यह बदलाव ITC (HS) क्लासिफिकेशन के तहत इंपोर्ट पॉलिसी में संशोधन करके किया है।

भारत सिल्वर इंपोर्ट पर कितना निर्भर है

भारत अपनी जरूरत की बड़ी मात्रा में चांदी विदेशों से खरीदता है। देश में घरेलू उत्पादन काफी कम है। ऐसे में जब रुपये पर दबाव बढ़ रहा हो, ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा हो और डॉलर की कमी की चिंता हो, तब सरकार इंपोर्ट कंट्रोल करने की कोशिश करती है।

अब सरकार चांदी को सिर्फ एक सामान्य कमोडिटी नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा भंडार पर असर डालने वाली संवेदनशील एसेट की तरह देख रही है।

क्या अब चांदी और महंगी हो सकती है

एक्सपर्ट्स का मानना है कि नए नियमों की वजह से घरेलू बाजार में चांदी की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। अगर इंपोर्टर्स के लिए चांदी लाना मुश्किल हुआ, तो बाजार में फिजिकल सिल्वर की कमी हो सकती है। ऐसी स्थिति में भारत में चांदी के दाम ग्लोबल मार्केट से ज्यादा तेजी से बढ़ सकते हैं। घरेलू प्रीमियम बढ़ने की भी आशंका है।

अगर सप्लाई पर दबाव बढ़ा, तो MCX पर चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से अलग चल सकती हैं। यानी भारत में सिल्वर ग्लोबल कीमतों के मुकाबले ज्यादा महंगी हो सकती है। तनाव वाले समय में यह अंतर और ज्यादा बढ़ सकता है।

इंडस्ट्री के लिए भी जरूरी है चांदी

चांदी सिर्फ निवेश या गहनों के लिए इस्तेमाल नहीं होती। इसका बड़ा इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और कई इंडस्ट्री में होता है।

अगर सप्लाई कम होने का डर बढ़ता है, तो इंडस्ट्री और बुलियन ट्रेडर्स ज्यादा स्टॉक जमा करना शुरू कर सकते हैं। इससे कीमतों में और तेज उछाल आ सकता है।

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