Silver Prices: चांदी ₹3 लाख तक जाएगी या ₹2.5 लाख तक गिर जाएगा भाव? एक्सपर्ट्स ने शॉर्ट-टर्म के लिए दी ये चेतावनी

Silver Prices: साल 2026 में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाते हुए अपने बुल रन को और मजबूत किया है। पिछले साल रिकॉर्ड रिटर्न के बाद जहां गिरावट की आशंका जताई जा रही थी। वहीं भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चांदी ने उम्मीदों के उलट मजबूती दिखाई है। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि छोटी अवधि में कुछ कंसोलिडेशन या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है

अपडेटेड Jan 14, 2026 पर 7:46 PM
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Silver Prices: भारत में सिल्वर फ्यूचर्स की कीमत करीब 2.9 लाख रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है

Silver Prices: साल 2026 में चांदी ने जबरदस्त तेजी दिखाते हुए अपने बुल रन को और मजबूत किया है। पिछले साल रिकॉर्ड रिटर्न के बाद जहां गिरावट की आशंका जताई जा रही थी। वहीं भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच चांदी ने उम्मीदों के उलट मजबूती दिखाई है। हालांकि, एनालिस्ट्स का मानना है कि छोटी अवधि में कुछ कंसोलिडेशन या उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। खासकर तब जब चांदी की कीमतें सिर्फ 2026 में ही करीब 22% उछल चुकी हैं।

MCX पर चांदी के नए रिकॉर्ड

भारत के मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) पर मार्च एक्सपायरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स करीब 5% की तेजी के साथ 2,87,990 रुपये प्रति किलो के नए ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गए। वहीं, मई और जुलाई एक्सपायरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स भी करीब 5% चढ़कर क्रमशः 2,94,503 रुपये प्रति किलो और 3,01,383 रुपये प्रति किलो के नए लाइफटाइम हाई पर पहुंच गए।

क्यों आई इतनी तेज तेजी?


चांदी में आई इस तेज उछाल के पीछे अमेरिका से आए महंगाई के आंकड़ों की बड़ी भूमिका रही। रॉयटर्स के मुताबिक, दिसंबर में अमेरिका का कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) महीने 0.2% और सालाना आधार पर 2.6% बढ़ा, जो बाजार अनुमानों से कम रहा। इससे फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में और कटौती की उम्मीदें मजबूत हुईं, जिसका सीधा फायदा सोने-चांदी जैसे कीमती धातुओं को मिला।

आगे क्या राह?

VT मार्केट के सीनियर मार्केट एनालिस्ट (APAC) जस्टिन खू के मुताबिक, ग्लोबल स्तर पर चांदी 90 डॉलर प्रति औंस से ऊपर और भारत में करीब 2.9 लाख रुपये प्रति किलो पर ट्रेड कर रही है। यह तेजी सेफ-हेवन डिमांड, भू-राजनीतिक जोखिम और सोने से मिल रही मजबूती का नतीजा है। हालांकि, उनका कहना है कि 3 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार करना अपने-आप में आसान नहीं होगा।

उन्होंने कहा, “तेज उछाल के बाद बाजार तकनीकी रूप से ओवरएक्सटेंडेड दिख रहा है। ऐसे में शॉर्ट टर्म में कंसोलिडेशन या वोलैटिलिटी से इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन अगर सोना रिकॉर्ड स्तर पर बना रहता है, डॉलर कमजोर रहता है और जोखिम से बचाव की मांग जारी रहती है, तो मीडियम टर्म में 3 लाख रुपये का स्तर पार करना काफी संभावित है।”

सप्लाई डेफिसिट और स्ट्रक्चरल डिमांड

बोन्नाजा के सीनियर कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव के अनुसार, चांदी पिछले कई सालों से सप्लाई डेफिसिट की स्थिति में है। यानी मांग माइनिंग और रीसाइक्लिंग से होने वाली सप्लाई से ज्यादा है। यही वजह है कि कीमतों पर लगातार ऊपर की ओर दबाव बना हुआ है।

उन्होंने बताया कि अब चांदी सिर्फ वैल्यू स्टोर नहीं रही, बल्कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, सेमीकंडक्टर्स और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स में इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। यह स्ट्रक्चरल डिमांड चांदी की कीमतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करती है।

जोखिम भी कम नहीं

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित दर कटौती से नॉन-यील्डिंग मेटल्स जैसे चांदी आकर्षक बनती है। वहीं, भू-राजनीतिक अनिश्चितता से सेफ-हेवन खरीदारी बढ़ती है और कमजोर डॉलर से स्थानीय करेंसी में कीमतें और ऊपर जाती हैं।

हालांकि, बहुत ऊंची कीमतों पर कुछ इंडस्ट्रीज विकल्प तलाश सकती हैं, जिससे डिमांड डिस्ट्रक्शन का जोखिम भी रहता है। इसके अलावा, सट्टेबाजी और पोजिशनिंग के चलते शॉर्ट टर्म में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

टेक्निकल नजरिया

टेक्निकल चार्ट्स की बात करें तो चांदी का वीकली और मंथली ट्रेंड अब भी बुलिश बना हुआ है। यादव के मुताबिक, लंबे समय के बेस से ब्रेकआउट के बाद हाईर हाई और हाईर लो का पैटर्न बना हुआ है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में बाजार काफी स्ट्रेच्ड है और मुनाफावसूली के चलते तेज गिरावट भी आ सकती है।

MCX पर चांदी के लिए अहम सपोर्ट ₹2,40,000 प्रति किलो और मजबूत रेजिस्टेंस ₹3,00,000 प्रति किलो के आसपास देखा जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों की राय है कि तेजी के इस दौर में “बाय ऑन डिप्स” की रणनीति ज्यादा बेहतर हो सकती है, न कि ऊंचे स्तरों पर आक्रामक खरीदारी।

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