Silver Price Outlook: 29 जनवरी के हाई से 41% गिर चुका है सिल्वर, अभी होल्ड करें, खरीदें या बेच दें?
29 जनवरी के बाद देश और विदेश में चांदी में गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब तक रुकने का नाम नहीं ले रहा है। 6 फरवरी को कमोडिटी एक्सचेंज MCX में सिल्वर फ्यूचर्स 2,49,499 रुपये प्रति किलोग्राम था। इसका मतलब है कि 29 जनवरी के ऑल-टाइम हाई से सिल्वर की कीमतें 41 फीसदी टूट चुकी हैं
2 फरवरी को सिल्वर फ्यूचर्स एमसीएक्स पर गिरकर 2,26,803 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया था।
सिल्वर के निवेशक निराश हैं। लगातार चांदी में तेजी को देख उन्होंने सिल्वर और सिल्वर ईटीएफ में निवेश किए थे। जनवरी के आखिर तक सिल्वर की कीमतें सातवें आसमान पर थीं। इससे पहले हर हफ्ते सिल्वर ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बना रहा था। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि जल्द सिल्वर की चाल बदलने वाली है। 29 जनवरी को एमसीएक्स पर सिल्वर 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 121 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। सिल्वर के इनवेस्टर्स पार्टी मना रहे थे।
29 जनवरी के बाद से चांदी 41 फीसदी क्रैश कर चुकी है
29 जनवरी के बाद देश और विदेश में चांदी में गिरावट का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह अब तक रुकने का नाम नहीं ले रहा है। 6 फरवरी को कमोडिटी एक्सचेंज MCX में सिल्वर फ्यूचर्स 2,49,499 रुपये प्रति किलोग्राम था। इसका मतलब है कि 29 जनवरी के ऑल-टाइम हाई से सिल्वर की कीमतें 41 फीसदी टूट चुकी हैं। किसी एसेट में करीब एक हफ्ते में 41 फीसदी की गिरावट निवेशकों का हौसला तोड़ देती है। आज सिल्वर के निवेशकों का यही हाल है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि उन्हें फिलहाल क्या करना चाहिए।
2 फरवरी को सिल्वर फ्यूचर्स 2.26 लाख तक गिर गया था
2 फरवरी को सिल्वर फ्यूचर्स एमसीएक्स पर गिरकर 2,26,803 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया था। तब से उसमें रिकवरी आई है। लेकिन, इससे फिजिकल सिल्वर या सिल्वर ईटीएफ के नुकसान की ज्यादा भरपाई नहीं हो पाई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमतें 70 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है। कई निवेशकों को चांदी में गिरावट बढ़ने का डर सता रहा है। चांदी में गिरावट का असर सिल्वर ईटीएफ पर पड़ा है।
फिलहाल चांदी का 85 डॉलर के ऊपर टिके रहना मुश्किल
यूबीएस के स्ट्रेटेजिस्ट का कहना है कि चांदी में गिरावट की बड़ी वजह दुनिया में रिस्क में आई कमी है। जहां तक चांदी के फंडामेंटल्स का सवाल है तो उसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। हालांकि, फिलहाल कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यूबीएस की रिपोर्ट में कहा गया है, "शॉर्ट टर्म में सिल्वर की कीमतों में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। जब तक इनवेस्टमेंट डिमांड नहीं बढ़ती है तब तक सिल्वर को 85 डॉलर प्रति औंस से ऊपर टिके रहने में दिक्कत आएगी।"
गिरावट के बावजूद चांदी के फंडामेंटल्स पर नहीं पड़ा है असर
चांदी के आउटलुक के बारे में यूपीएस के एनालिस्ट्स का कहना है कि मौजूदा कीमतों पर चांदी में लंबी अवधि के निवेश से बचना चाहिए। लेकिन, यह बात समझने की जरूरत है कि लंबी अवधि में चांदी के फंडामेंटल्स पर असर नहीं पड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है, "इंटरेस्ट रेट में कमी का रुख है, ग्लोबल डेट को लेकर चिंता बढ़ रही है, अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम हो रही है। 2026 में ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ में रिकवरी की उम्मीद है। इससे चांदी की कीमतों को सपोर्ट मिलेगा।"
चांदी की सप्लाई और डिमांड के बीच बड़ा फर्क बना रहेगा
यूबीएस का कहना है कि इस साल चांदी की सप्लाई डिमांड के मुकाबले करीब 30 करोड़ औंस कम रहने की उम्मीद है। इनवेस्टमेंट डिमांड 40 करोड़ औंस को पार कर जाने की संभावना है। हालांकि, ऊंची कीमतों का असर चांदी के इंडस्ट्रियल इस्तेमाल पर पड़ेगा। यूबीएस का कहना है कि 65 डॉलर प्रति औंस का लेवल ज्यादा अट्रैक्टिव लगता है। चांदी की कीमतें इस लेवल से नीचे जाने की उम्मीद नहीं है। एमकेएस पैंप की रिसर्च हेड निकी शिल्स का कहना है कि सिल्वर 60 डॉलर तक जा सकता है।
अगले साल मार्च तक चांदी 134 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है
ओसीबीसी के एमडी (इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी) वासु मेनन का कहा है कि चांदी के शॉर्ट टर्म सेंटिमेंट पर काफी खराब असर पड़ा है। लेकिन, जो इनवेस्टर्स उतार-चढ़ाव बर्दाश्त कर सकते हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सिल्वर को एक हाइब्रिड एसेट के रूप में लेना चाहिए। इसमें प्रेसियस मेटल और इंडस्ट्रियल मेटल की खासियत है। साथ ही इसका इस्तेमाल स्पेकुलेशन के लिए होता है। मेनने ने लंबी अवधि में चांदी के लिए 134 डॉलर प्रति औंस का टारगेट दिया। लेकिन, इसके लिए निवेशकों को अगले साल मार्च तक इंतजार करना पड़ सकता है।
सिल्वर और सिल्वर ईटीएफ के निवेशकों को क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जिन निवेशकों को तुरंत पैसे की जरूरत नहीं है, वे एक साल तक इंतजार कर सकते हैं। जो ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते, वे बीच-बीच में आने वाली तेजी के मौके का इस्तेमाल सिल्वर से एग्जिट करने के लिए कर सकते हैं। एक बार में पूरी बिकवाली करने की जगह हर तेजी पर थोड़ी-थोड़ी बिकवाली की सलाह है। जिन निवेशकों ने चांदी में निवेश अब तक नहीं किया है, वे इसकी कीमतें 60-65 डॉलर तक जाने पर निवेश कर सकते हैं। लेकिन, उनका निवेश लंबी अवधि के लिए होना चाहिए।