Silver Prices: चीन में भारत से 17% महंगी बिक रही चांदी, क्या कीमतों में आएगा बड़ा उछाल?
Silver Prices: चीन में चांदी भारत के मुकाबले 17 प्रतिशत महंगी बिक रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे ग्लोबल सिल्वर मार्केट में उतार चढ़ाव और बढ़ सकता है। जानिए चीन में चांदी की कीमतें ज्यादा क्यों हैं और इसका ग्लोबल मार्केट पर क्या असर पड़ सकता है।
1 जनवरी 2026 से चीन में चांदी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
Silver Prices: इस समय चीन में चांदी अंतरराष्ट्रीय बाजार के मुकाबले प्रीमियम पर ट्रेड कर रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी आज 3 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी के साथ 109 डॉलर प्रति औंस के ऊपर पहुंच गई है। 2026 में अब तक चांदी करीब 44 प्रतिशत चढ़ चुकी है, जबकि पिछले 12 महीनों में इसमें 250 प्रतिशत से ज्यादा की जबरदस्त बढ़त दर्ज की गई है।
लेकिन चीन में हालात और भी अलग हैं। वहां चांदी की स्थानीय कीमतें प्रीमियम के चलते 125 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुकी हैं।
भारत बनाम चीन: कहां सस्ती है चांदी
भारत में आज चांदी का भाव 335 रुपये प्रति ग्राम है। अगर इसकी तुलना चीन से करें, तो भारत में चांदी करीब 17 प्रतिशत सस्ती नजर आती है।
1 औंस लगभग 28.3 ग्राम के बराबर होता है। इस हिसाब से भारत में 1 औंस चांदी की कीमत करीब 9,984 रुपये बैठती है। वहीं चीन में 1 औंस चांदी करीब 125 डॉलर पर ट्रेड हो रही है। अगर 1 डॉलर का एक्सचेंज रेट 91.6 रुपये मानें, तो चीन में 1 औंस चांदी की कीमत करीब 11,450 रुपये बनती है।
इस तरह भारत और चीन में 1 औंस चांदी की कीमत के बीच करीब 1,969 रुपये का अंतर है, जो लगभग 17 प्रतिशत का डिफरेंस दिखाता है।
चीन में चांदी महंगी होने की वजह
भारत के मुकाबले चीन में चांदी की कीमत ज्यादा होने की सबसे बड़ी वजह वहां की मजबूत मांग है। इसके अलावा, इस अंतर के पीछे एक अहम पॉलिसी फैसला भी है, जिसने सप्लाई को और टाइट कर दिया है।
चांदी में आई मौजूदा तेजी की एक बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर सप्लाई की कमी रही है। दुनिया भर में चांदी की मांग लगातार सप्लाई से ज्यादा बनी हुई है। ऐसे में जब चीन जैसे बड़े खिलाड़ी ने पाबंदी लगाई, तो कीमतों पर दबाव और बढ़ गया।
चीन ने चांदी के एक्सपोर्ट पर लगाई रोक
चीन ने 2026 से चांदी के एक्सपोर्ट पर सख्ती कर दी है। नए नियमों के तहत अब चांदी का निर्यात करने के लिए कंपनियों को सरकार से एक्सपोर्ट लाइसेंस लेना जरूरी होगा। यह पॉलिसी 2027 तक लागू रहेगी।
जब इस पाबंदी का ऐलान हुआ था, तब अमेरिकी अरबपति एलॉन मस्क ने भी सप्लाई को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने X पर लिखा था कि यह अच्छा संकेत नहीं है, क्योंकि चांदी कई इंडस्ट्रियल प्रोसेस में बेहद जरूरी होती है।
चीन की पाबंदी ने बढ़ाया दाम
चांदी पहले ही सप्लाई की कमी से जूझ रही थी। अब चीन द्वारा एक्सपोर्ट पर रोक लगाने से बाजार में उतार चढ़ाव और तेज हो सकता है। सप्लाई घटेगी, जबकि इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट डिमांड बनी रहेगी।
चीन दुनिया की कुल चांदी सप्लाई का 65 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा रखता है। यह देश फिजिकल इन्वेस्टमेंट और पेपर ट्रेडिंग, जैसे सिल्वर फ्यूचर्स और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स का सबसे बड़ा बाजार है। इसके अलावा, चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिल्वर फैब्रिकेटर भी है।
अगर चीन एक्सपोर्ट लिमिट को और सख्ती से लागू करता है, तो ग्लोबल सप्लाई चेन पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
क्या कहता है सिल्वर इंस्टीट्यूट
सिल्वर इंस्टीट्यूट के मुताबिक, पिछले पांच सालों से चांदी में लगातार स्ट्रक्चरल डेफिसिट बना हुआ है। इसका मतलब यह है कि हर साल चांदी की मांग, उसकी सप्लाई से ज्यादा रही है। यही वजह है कि कीमतों पर ऊपर की तरफ दबाव बना हुआ है।
1 जनवरी 2026 से लागू होगा नया नियम
1 जनवरी 2026 से चीन में चांदी एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। यह लाइसेंस सिर्फ बड़ी और सरकार से मान्यता प्राप्त कंपनियों को ही मिलेगा, जो कड़े प्रोडक्शन और फाइनेंशियल मानकों को पूरा करती हों।
इस नियम से छोटे एक्सपोर्टर्स बाहर हो जाएंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीन से आने वाली चांदी की उपलब्धता और कम हो सकती है।
क्या चीन की कीमतें ग्लोबल संकेत दे रही हैं
ऐसा माना जा रहा है कि चीन में चांदी की ऊंची कीमतें आने वाले समय में ग्लोबल मार्केट की दिशा दिखा सकती हैं। हालांकि, यह तेजी कब तक टिकेगी, इस पर सवाल बने हुए हैं।
निवेशकों को चांदी में आई इस सीधी और तेज तेजी को देखकर सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि जिस रफ्तार से कीमतें बढ़ी हैं, उसी तेजी से करेक्शन भी आ सकता है।
लूनर न्यू ईयर का असर भी अहम
चीन में लूनर न्यू ईयर की छुट्टियां 17 फरवरी 2026 से शुरू होती हैं और करीब एक हफ्ते तक चलती हैं। इस दौरान फैक्ट्रियां और बाजार बंद रहते हैं। आमतौर पर इस छुट्टी से पहले खरीदार चांदी का स्टॉक जमा करते हैं, जिससे मांग और कीमतों पर असर पड़ता है।
कई बार छुट्टियों के दौरान बाजार गतिविधियां कम भी हो जाती हैं। मौजूदा हालात में, जब शंघाई में चांदी का स्टॉक पहले ही कम है और प्रीमियम ऊंचा बना हुआ है, तो ये फैक्टर ग्लोबल सिल्वर मार्केट पर भी असर डाल सकते हैं।