Silver Rate: चांदी की कीमतों में इस महीने जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। जनवरी में ही घरेलू बाजार में चांदी 32,000 रुपये से ज्यादा महंगी हो चुकी है। MCX पर मार्च फ्यूचर्स ने 16 जनवरी को 2,92,865 रुपये प्रति किलो का नया रिकॉर्ड बना दिया। ऐसे में आम निवेशकों के मन में सबसे बड़ा सवाल है कि क्या यह चांदी खरीदने का सही समय है?
पिछले एक साल में चांदी की तेजी वाकई हैरान करने वाली रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तेजी के पीछे सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि मजबूत इंडस्ट्रियल डिमांड भी बड़ी वजह है। सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में चांदी की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जबकि सप्लाई सीमित बनी हुई है।
मार्केट एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आने वाले समय में चांदी के दाम और ऊपर जा सकते हैं। कुछ तकनीकी संकेतों के मुताबिक मिड टर्म पीरियड में चांदी 3 लाख रुपये से 3.5 लाख रुपये प्रति किलो तक के स्तर को छू सकती है। यहां तक कि तेज रफ्तार बनी रही तो लंबे समय में 4 लाख रुपये प्रति किलो का आंकड़ा भी दूर नहीं माना जा रहा।
भारत में चांदी अब सिर्फ पारंपरिक निवेश या गहनों तक सीमित नहीं रही है। रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार के बढ़ते फोकस के चलते चांदी की औद्योगिक अहमियत और बढ़ गई है। यही वजह है कि अब बड़े निवेशक, HNI और फैमिली ऑफिस भी अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड के साथ-साथ चांदी को जगह दे रहे हैं।
हालांकि, एक्सपर्ट्स आम निवेशकों को सावधानी की सलाह भी दे रहे हैं। चांदी, सोने के मुकाबले ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला मेटल है। ग्लोबल इकोनॉमी, डॉलर की चाल और सट्टेबाजी का इस पर सीधा असर पड़ता है। इसलिए बिना योजना के ऊंचे स्तर पर खरीदारी जोखिम भरी हो सकती है।
कुछ एक्सपर्ट का मानना है कि मौजूदा दामों पर सीधे खरीदारी करने के बजाय थोड़ा करेक्शन आने का इंतजार करना बेहतर रहेगा। उनके अनुसार, अगर चांदी 2.50 लाख रुपये से 2.60 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास आती है, तो ये स्तर खरीद के लिए ज्यादा सुरक्षित माने जा सकते हैं। वहीं कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि बड़ी गिरावट की संभावना कम है, इसलिए गिरावट पर सीमित मात्रा में खरीदारी की जा सकती है। चांदी में लंबे पीरियड में कहानी मजबूत नजर आती है, लेकिन आम निवेशकों के लिए जरूरी है कि वह जल्दबाजी न करें।