SIP से ₹1 करोड़ का फंड... जानिए 25, 30 और 40 साल में शुरुआत पर कितना करना होगा निवेश

SIP Investment Plan: अगर 60 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड बनाना है, तो आपकी शुरुआत की उम्र बेहद अहम है। जानिए 25, 30 और 40 साल में SIP शुरू करने पर हर महीने कितना निवेश जरूरी होगा।

अपडेटेड Feb 24, 2026 पर 3:07 PM
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हर किसी को 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का मौका नहीं मिलता।

SIP Investment Plan: सिस्टेमैटिक इनस्टमेंट प्लान यानी SIP अब लाखों भारतीयों के लिए वेल्थ बनाने का सबसे भरोसेमंद तरीका बन चुका है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 2026 में SIP के जरिए 31,002 करोड़ रुपये का निवेश आया। यानी अब SIP सिर्फ निवेश का एक तरीका नहीं, बल्कि भारतीय घरों की फाइनेंशियल प्लानिंग का अहम हिस्सा बन चुका है।

अब सवाल यह है कि अगर आपका टारगेट 60 साल की उम्र तक 1 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड बनाना है, तो हर महीने कितनी SIP करनी चाहिए? और क्या यह रकम आपकी शुरुआत की उम्र पर निर्भर करती है?

मान लेते हैं 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न


गणना को आसान बनाने के लिए यहां 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न माना गया है। लंबे समय में कई इक्विटी फंड कैटेगरी जैसे मिड कैप, स्मॉल कैप और फ्लेक्सी कैप फंड ने औसतन इतना या इससे ज्यादा रिटर्न दिया है। लेकिन यह सिर्फ उदाहरण है। असली रिटर्न बाजार की चाल पर निर्भर करेगा। अब देखते हैं कि उम्र के हिसाब से तस्वीर कैसे बदलती है।

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अगर 25 साल की उम्र में शुरुआत करें

अगर कोई 25 साल की उम्र में SIP शुरू करता है और 60 साल तक यानी 35 साल निवेश करता है, तो सिर्फ 1,000 रुपये महीना निवेश करने से करीब 1.14 करोड़ रुपये का फंड बन सकता है।

सोचिए, सिर्फ 1,000 रुपये महीना। यहां असली ताकत लंबा समय है। कंपाउंडिंग यानी रिटर्न पर रिटर्न अपना काम करता रहता है। निवेशक की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ता, लेकिन समय उसकी सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।

अगर 30 साल की उम्र में शुरुआत करें

अब मान लीजिए शुरुआत 30 साल में होती है। निवेश की अवधि घटकर 30 साल रह जाती है। ऐसे में करीब 2,000 रुपये महीना निवेश करना होगा ताकि 60 साल तक लगभग 1.12 करोड़ रुपये जुटाए जा सकें। सिर्फ पांच साल की देरी और मासिक निवेश की जरूरत दोगुनी। यही निवेश में टालमटोल की कीमत है।

अगर 40 साल की उम्र में शुरुआत करें

अब तस्वीर और साफ हो जाती है। अगर कोई 40 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है, तो उसके पास सिर्फ 20 साल बचते हैं। 1 करोड़ रुपये का टारगेट पाने के लिए उसे करीब 7,500 रुपये हर महीने निवेश करने होंगे। ध्यान दीजिए, रिटर्न वही 15 प्रतिशत है। फर्क सिर्फ समय का है। समय कम हुआ, तो हर महीने का निवेश कई गुना बढ़ गया।

स्टेप अप SIP बन सकता है सहारा

हर किसी को 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करने का मौका नहीं मिलता। लेकिन अगर शुरुआत देर से भी हो, तो रास्ता बंद नहीं होता।

मान लीजिए कोई 45 साल की उम्र में शुरुआत करता है। वह 10,000 रुपये महीना निवेश करता है और हर साल अपनी SIP में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करता है। अगर यह निवेश 60 साल तक यानी 15 साल चलता है और औसतन 15 प्रतिशत रिटर्न मिलता है, तो करीब 1.02 करोड़ रुपये का फंड तैयार किया जा सकता है। इससे साफ है कि अगर समय कम है, तो बढ़ती हुई SIP यानी स्टेप अप स्ट्रैटेजी काफी मदद कर सकती है।

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लंबी अवधि में SIP क्यों काम करता है

SIP की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग है। जितना लंबा समय, उतना ज्यादा रिटर्न पर रिटर्न। दूसरी ताकत है रुपया कॉस्ट एवरेजिंग। बाजार गिरने पर ज्यादा यूनिट मिलती हैं, चढ़ने पर कम। इससे औसत लागत संतुलित रहती है।

तीसरी बात, SIP निवेश को अनुशासित बनाता है। हर महीने तय रकम निवेश होती है, इसलिए डर और लालच जैसे इमोशन कम असर डालते हैं।

सबसे बड़ी बात, आप छोटी रकम से शुरुआत कर सकते हैं और बाद में अपनी आय बढ़ने पर SIP बढ़ा सकते हैं। रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या लंबी अवधि के किसी भी टारगेट के लिए यह आसान तरीका है।

15 प्रतिशत रिटर्न गारंटी नहीं है

यह समझना जरूरी है कि 15 प्रतिशत रिटर्न सिर्फ उदाहरण के लिए लिया गया है। बाजार हमेशा एक जैसा नहीं रहता। छोटी अवधि में उतार चढ़ाव काफी तेज हो सकता है। अलग अलग फंड कैटेगरी में जोखिम भी अलग होता है। यह 8 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक हो सकता है।

लंबी अवधि यानी 30 से 35 साल में औसत रिटर्न बेहतर दिख सकता है, लेकिन छोटी अवधि में बाजार का असर ज्यादा दिखाई देता है। इसलिए निवेश से पहले अपनी जोखिम लेने की क्षमता को समझना जरूरी है।

लंबी अवधि के निवेश के लिए कुछ जरूरी बातें

  • बाजार में गिरावट आए तो SIP बंद न करें। उतार चढ़ाव इक्विटी का हिस्सा है।
  • जब आय बढ़े, तो SIP भी 5 से 10 प्रतिशत बढ़ाने की आदत डालें।
  • सारा पैसा एक ही फंड या एक ही कैटेगरी में न लगाएं। संतुलन जरूरी है।
  • पोर्टफोलियो का साल में एक बार रिव्यू करें, लेकिन हर छोटी गिरावट पर बदलाव करने से बचें।
  • जैसे जैसे रिटायरमेंट करीब आए, कुछ हिस्सा सुरक्षित साधनों में शिफ्ट करना समझदारी है।

बाजार को नहीं, समय को पकड़िए

1 करोड़ रुपये का फंड बनाना बाजार की सही टाइमिंग से नहीं, बल्कि बाजार में लंबे समय तक बने रहने से होता है।

  • 25 साल की उम्र में 1,000 रुपये काफी हो सकते हैं।
  • 30 साल में 2,000 रुपये की जरूरत पड़ती है।
  • 40 साल में 7,500 रुपये महीना लगाना पड़ता है।
  • 45 साल में स्टेप अप स्ट्रैटेजी जरूरी हो जाती है।

निवेश में सबसे बड़ा फर्क रिटर्न नहीं, बल्कि समय डालता है। जो जल्दी शुरू करता है, उसे कम मेहनत करनी पड़ती है। जो देर करता है, उसे ज्यादा रकम लगानी पड़ती है। फैसला आपके हाथ में है।

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