Sovereign Gold Bonds: आरबीआई ने मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन का ऐलान किया, इनवेस्टर्स को मिला 156% रिटर्न

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) इश्यू होने की तारीख से 8 साल बाद मैच्योर कर जाते हैं। इश्यू की तारीख से 5 साल बाद इन्हें भुनाने की इजाजत है। इसका मतलब है कि अगर कोई इनवेस्टर 8 साल तक इंतजार नहीं करना चाहता है तो वह पांच साल बाद अपने पैसे निकाल (रिडेम्प्शन) सकता है

अपडेटेड Sep 12, 2025 पर 3:45 PM
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत 2015 में हुई थी।

रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 2019-20 सीरीज एक्स बॉन्ड्स की मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन का ऐलान कर दिया है। ये बॉन्ड्स 11 मार्च, 2020 को प्रति यूनिट 4,260 रुपये पर इश्यू किए गए थे। आरबीआई ने रिडेम्प्शन प्राइस 10,905 रुपये प्रति यूनिट तय किया है। यह इश्यू प्राइस से 1555.99 फीसदी ज्यादा है। इसमें निवेश की अवधि में मिलने वाला इंटरेस्ट शामिल नहीं है।

एसजीबी की यह किस्त 11 मार्च, 2020 को आई थी

RBI ने इस बारे में 10 सितंबर को एक स्टेटमेंट जारी किया। इसमें कहा गया है, "11 मार्च, 2020 को इश्यू किए गए SGB 2019-20 सीरीज एक्स किस्त की मैच्योरिटी से पहले रिडेम्प्शन की डेट 11 सितंबर, 2025 होगी।" रिडेम्प्शन का प्राइस 8, 9, और 10 सितंबर, 2025 के गोल्ड के क्लोजिंग प्राइस के सिंपल एवरेज के आधार पर तय किया गया है। यह क्लोजिंग प्राइस इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) जारी करती है।


एसजीबी का मैच्योरिटी पीरियड 8 साल 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) इश्यू होने की तारीख से 8 साल बाद मैच्योर कर जाते हैं। इश्यू की तारीख से 5 साल बाद इन्हें भुनाने की इजाजत है। इसका मतलब है कि अगर कोई इनवेस्टर 8 साल तक इंतजार नहीं करना चाहता है तो वह पांच साल बाद अपने पैसे निकाल (रिडेम्प्शन) सकता है। इंटरेस्ट पेमेंट की अगली तारीख पर रिपेमेंट हो जाता है।

2015 में हुई थी एसजीबी स्कीम की शुरुआत

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत 2015 में हुई थी। सरकार ने इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड में निवेश का विकल्प देने के लिए यह स्कीम शुरू की थी। केंद्र सरकार की तरफ से आरबीआई इनवेस्टर्स को ये बॉन्ड्स इश्यू करता है। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को दो तरह से फायदा होता है। पहला, उसे इनवेस्टमेंट अमाउंट पर सालाना 2.5 फीसदी इंटरेस्ट मिलता है। दूसरा, मैच्योरिटी के वक्त गोल्ड की कीमत के हिसाब से कैपिटल गेंस का फायदा मिलता है।

इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड में निवेश का विकल्प मिला

एसजीबी स्कीम को इनवेस्टर्स का अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। फिजिकल गोल्ड जैसे गोल्ड ज्वेलरी, कॉइन, बार आदि में निवेश करने वाले लोगों को एक विकल्प देने के लिए सरकार ने एसजीबी स्कीम की शुरुआत की थी। लोगों के फिजिकल गोल्ड में ज्यादा निवेश करने से सरकार को गोल्ड का ज्यादा आयात करना पड़ता है। गोल्ड के आयात पर सरकार को विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है। लेकिन, पिछले 1-2 साल में गोल्ड की कीमतों में आई ज्यादा तेजी के बाद सरकार ने एसजीबी की नई किस्त जारी नहीं की है।

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टैक्स के लिहाज से स्कीम काफी अट्रैक्टिव

टैक्स के लिहाज से एसजीबी में निवेश काफी फायदेमंद है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 43 के तहत एसजीबी पर मिलने वाला इंटरेस्ट टैक्स के दायरे में आता है। लेकिन, इन बॉन्ड्स को भुनाने पर इनवेस्टर्स को होने वाला कैपिटल गेंस टैक्स के दायरे में नहीं आता है। अगर एक्सचेंज के प्लेटफॉर्म के जरिए एसजीबी को बेचा जाता है तो उससे हुए कैपिटल गेंस पर इंडेक्सेशन बेनेफिट मिलता है।

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