सरकार का फोकस इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इसके लिए इनकम टैक्स की नई रीजीम को आसान बनाने के उपाय करती आई हैं। इस बार बजट में टैक्सपेयर्स खासकर सैलरीड टैक्सपेयर्स की नजरें स्टैंडर्ड डिडक्शन पर लगी हैं।
सरकार का फोकस इनकम टैक्स के नियमों को आसान बनाने पर है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण इसके लिए इनकम टैक्स की नई रीजीम को आसान बनाने के उपाय करती आई हैं। इस बार बजट में टैक्सपेयर्स खासकर सैलरीड टैक्सपेयर्स की नजरें स्टैंडर्ड डिडक्शन पर लगी हैं।
नई रीजीम में ज्यादातर डिडक्शंस नहीं मिलते हैं
इनकम टैक्स की नई रीजीम अब डिफॉल्ट रीजीम हो गई है। इसमें ज्यादातर डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस नहीं मिलते हैं। लेकिन, टैक्स के रेट्स कम हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लाइफ स्टाइल पर लोगों का खर्च बढ़ रहा है। इनफ्लेशन ने परिवार के बजट पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में मौजूदा स्टैंडर्ड डिडक्शन क्या पर्याप्त है?
नौकरी करने वालों को स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा
स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा नौकरी करने वाले लोगों और पेंशनर्स दोनों को मिलता है। यह बेनेफिट इनकम टैक्स की नई और पुरानी दोनों रीजीम में उपलब्ध है। इससे टैक्सेबल इनकम घट जाती है। इसके लिए कोई इनवेस्टमेंट नहीं करना पड़ता है। न ही किसी तरह का प्रूफ देने की जरूरत होती है।
नई और पुरानी दोनों रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन
इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये है। इनकम टैक्स की नई रीजीम में यह 75,000 रुपये है। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर सुधाकर सेतुरमण ने कहा, "सरकार ने फाइनेंस एक्ट, 2024 में टैक्सपेयर्स को राहत देने के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया था। यह देखते हुए कि इनफ्लेशन अपेक्षाकृत स्टेबल है और फोकस नई रीजीम को आसान बनाए रखने पर है, सरकार शॉर्ट टर्म में स्टैबिलिटी बनाए रखना चाहेगी।"
ज्योग्राफिक आधार पर नहीं मिलता डिडक्शन
एक्सपर्ट्स का कहना है कि कॉस्ट ऑफ लिविंग में फर्क होने के बावजूद यह किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत फैसला हो सकता है कि वह कहां रहना चाहता है या सेटल होना चाहता है। टैक्स फ्रेमवर्क लोकेशन न्यूट्र्ल एप्रोच अपनाता है। नांगिया एंड कंपनी एलएलपी के पार्टनर नीरज अग्रवाल ने कहा, "टैक्स के नियम पूरे देश के लिए एक समान होते हैं। इसमें ज्योग्राफिक लोकेशन के आधार पर डिडक्शन नहीं मिलता है।"
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निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार बजट पेश करेंगी
यूनियन बजट 1 फरवरी को पेश होगा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार 9वीं बार यूनियन बजट पेश करेंगी। उन्होंने पिछले साल टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी थी। उन्होंने यूनियन बजट में सालाना 12 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री कर दिया था। इससे मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को काफी फायदा हुआ था।
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