उतार-चढ़ाव के बीच 10 लाख रुपये का निवेश कहां करना चाहिए! Samco MF के उमेशकुमार मेहता ने दी यह सलाह

Samco Mutual Fund के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर उमेशकुमार मेहता ने यह साफ कर दिया है कि निवेश के लिहाज से यह थोड़ा मुश्किल समय है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में उछाल की वजह से तस्वीर बदल गई है। यूएस में बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर इंडियन स्टॉक मार्केट्स में विदेशी फंडों के निवेश पर पड़ेगा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2007 के बाद सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इससे इंडिया सहित उभरते बाजारों के स्टॉक्स विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा अट्रैक्टिव नहीं रह गए हैं

अपडेटेड Oct 30, 2023 पर 1:59 PM
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मेहता ने कहा कि अमेरिका अब भी निवेश के लिहाज से सुरक्षित माना जा रहा है। अमेरिका और इंडिया की बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर घटने से अमेरिका में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ सकती है। अमेरिका में निवेश करना उभरते बाजारों के मुकाबले कम रिस्की है।

स्टॉक मार्केट्स में आई हालिया गिरावट ने इनवेस्टर्स को डरा दिया है। खासकर एकमुश्त निवेश करने वाले लोगों को यह समझ नहीं आ रहा कि उन्हें कहां निवेश करने पर अच्छा मुनाफा मिलेगा। ऐसे लोगों की मुश्किल आसान करने के लिए मनीकंट्रोल ने Samco Mutual Fund के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर उमेशकुमार मेहता से बातचीत की। उनसे स्टॉक्स मार्केट और इनवेस्टमेंट से जुड़े कई दूसरे सवाल भी पूछे। मेहता ने यह साफ कर दिया है कि निवेश के लिहाज से यह थोड़ा मुश्किल समय है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में उछाल की वजह से तस्वीर बदल गई है। यूएस में बॉन्ड यील्ड बढ़ने का सीधा असर इंडियन स्टॉक मार्केट्स में विदेशी फंडों के निवेश पर पड़ेगा। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड 2007 के बाद सबसे हाई लेवल पर पहुंच गई है। इससे इंडिया सहित उभरते बाजारों के स्टॉक्स विदेशी निवेशकों के लिए ज्यादा अट्रैक्टिव नहीं रह गए हैं। आने वाले दिनों में इक्विटी और डेट मार्केट्स में विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ सकती है। यह इंडिया जैसे मार्केट के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

इनवेस्टर्स की दिलचस्पी अमेरिका में बढ़ सकती है

मेहता ने कहा कि अमेरिका अब भी निवेश के लिहाज से सुरक्षित माना जा रहा है। अमेरिका और इंडिया की बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर घटने से अमेरिका में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ सकती है। अमेरिका में निवेश करना उभरते बाजारों के मुकाबले कम रिस्की है। शॉर्ट से मीडियम टर्म में स्टॉक मार्केट्स पर जियोपॉलिटिकल टेंशन, हाई इनफ्लेशन और कमजोर इकोनॉमिक आउटलुक का असर दिख सकता है। ऐसे में इनवेस्टर्स को निवेश के मामले में अुशासन बनाए रखना होगा। उन्हें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। इंटरेस्ट रेट्स बढ़ रहे हैं और इसमें अगले साल के मध्य तक ही गिरावट आने का इंतजार है। इंटरेस्ट रेट में कमी आने पर बॉन्ड्स में मजबूती आएगी। खासकर लंबी अवधि के बॉन्ड्स की चमक बढ़ेगी।


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10 लाख रुपये का निवेश कहां करने में ज्यादा फायदा?

10 लाख रुपये के निवेश कहां करना सही रहेगा? इस सवाल के जवाब में मेहता ने कहा कि निवेशक को अपने पोर्टफोलियो में स्टॉक्स, डेट और गोल्ड तीनों को शामिल करने की जरूरत है। जिन निवेशकों ने लार्जकैप में निवेश नहीं किया है, उन्हें ऐसे स्टॉक में निवेश करना ठीक रहेगा। लार्जकैप शेयरों की वैल्यूएशन सही है। हालांकि, गिरावट का असर इन पर भी पड़ेगा। इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IT), फाइनेंशियल सर्विसेज, बड़ी एनबीएफसी, ग्रीन पावर और डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के स्टॉक्स में पैसा लगाना ठीक रहेगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन सेक्टर की कंपनियों के शेयर की वैल्यूएशंस ठीक लग रही है। ऐसे में मार्केट में हर गिरावट का इस्तेमाल इनमें निवेश बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।

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मोमेंटम फंड का फोकस सिर्फ तेजी वाले स्टॉक्स पर

सैमको म्यूचुअल फंड के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर ने कहा कि उनके म्यूचुअल फंड हाउसेज के मोमेंटम फंड ने स्मॉल और मिडकैप स्टॉक्स में ज्यादा निवेश किया है। इसकी वजह यह है कि इस फंड का उद्देश्य ऐसे स्टॉक्स में निवेश करना है, जिनमें मोमेंटम है। इसलिए सेक्टर और मार्केट कैप मायने नहीं रखता है। हमने मिड, स्मॉल और माइक्रोकैप स्टॉक्स में स्टॉन्ग मोमेंटम देखा है। इसलिए हमारे मोमेंटम फंड का झुकाव इन स्टॉक्स की तरफ है। जब इस मोमेंटम में बदलाव आएगा तो इसका असर फंड के पोर्टफोलियो पर भी दिखेगा। मोमेंटम इनवेस्टिंग वह स्ट्रेटेजी है, जिसमें मार्केट की दिशा का अंदाजा लगाने की जगह प्राइस एक्शन को फॉलो किया जाता है।

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