Stock Markets: मार्केट क्रैश करने पर आपके SIP पर क्या असर पड़ता है?

अमेरिका-ईरान लड़ाई का असर शेयर शेयर बाजार पर पड़ा है। मार्केट में गिरावट देखने को मिला है। इसका असर इनवेस्टर्स को म्यूचुअल फंड्स में अपने निवेश पर पड़ने का डर है। खासकर सिप के निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कई महीने पहले किए गए निवेश की वैल्यू उन्हें गिरती हुई दिख रही है

अपडेटेड Mar 05, 2026 पर 7:03 PM
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हर बार मार्केट गिरने पर इनवेस्टर को ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। इससे निवेशक चिंतित हैं। उन्हें मार्केट में गिरावट का असर म्यूचुअल फंड्स में अपने निवेश पर पड़ने का डर है। खासकर सिप के निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। कई महीने पहले किए गए निवेश की वैल्यू उन्हें गिरती हुई दिखती है। लेकिन, सच यह है कि मार्केट क्रैश करने का ज्यादा असर सिप से आपके निवेश पर नहीं पड़ता है।

मार्केट क्रैश करने पर एनएवी गिर जाती है

मार्केट क्रैश करने के बावजूद सिप अपना काम करता रहता है। आपका सिप का पैसा तय तारीख को आपके अकाउंट से कटता है। आपको पहले की तरह म्यूचुअल फंड स्कीम की यूनिट्स एलॉट होती हैं। फर्क सिर्फ NAV यानी नेट एसेट वैल्यू के मामले में आता है। जब मार्केट क्रैश करता है तो एनएवी गिर जाती है। इसका मतलब है कि फंड हाउस सिप अमाउंट पर आपको ज्यादा यूनिट्स एलॉट करती है।


मार्केट गिरने पर एवरेज पर्चेज कॉस्ट घटती है

हर बार मार्केट गिरने पर इनवेस्टर को ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं। इससे उसका एवरेज पर्चेज कॉस्ट घट जाती है। लेकिन, ऐसा तभी होता है कि जब इनवेस्टर बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद अपना निवेश जारी रखता है यानी वह अपना सिप बंद नहीं करता है। हालांकि, कई लोग डर कर अपना सिप बंद कर देते हैं। इससे वे अपनी एवरेज पर्चेज कॉस्ट घटाने का मौका चूक जाते हैं। इसका सीधा असर उनके रिटर्न पर पड़ता है।

निवेश में लॉस दिखने की यह है वजह

मार्केट क्रैश करने पर पहले किए गए निवेश पर आपको लॉस दिखता है। इसकी वजह यह है कि पहले आपको ज्यादा एनएवी पर यूनिट्स एलॉट हुई थीं। इसे आप बदल नहीं सकते, लेकिन कम एनएवी पर यूनिट्स एलॉट होने पर आप खुश जरूर हो सकते हैं। अगर मार्केट में कमजोरी ज्यादा समय तक बनी रहती है तो इसका मतलब है कि आपके निवेश का एक हिस्सा कम एनएवी पर हुआ है।

गिरावट में निवेश करने पर बाद में मिलता है फायदा

मार्केट जब रिकवर करता है तो कम एनएवी पर एलॉट की गई यूनिट्स कमाल दिखाती हैं। एनएवी बढ़ने पर आपका रिटर्न बढ़ जाता है। यही वजह है कि मार्केट में गिरावट के दौर में किया गया निवेश लंबी अवधि में आपको ज्यादा रिटर्न हासिल करने में काफी मदद करता है। ज्यादातर इनवेस्टर इस बात को नहीं समझते। इससे मार्केट क्रैश करने पर उन्हें अपना पैसा डूबने का डर सताने लगता है। लेकिन, होता इसका उल्टा होता है।

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लंबी अवधि में मार्केट में गिरावट का असर नहीं

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्केट में बड़ी गिरावट के दौरान सिप बंद करना बड़ी भूल है। इससे निवेशक बाद में मोटी कमाई का मौका चूक जाता है। खासकर जो इनवेस्टर्स लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे है, उन्हें तो मार्केट में गिरावट से निवेश रोकने के बारे में कभी नहीं सोचना चाहिए। यह देखा गया है कि शेयर बाजार में उतारचढ़ाव का असर लंबी अवधि में नहीं पड़ता है।

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