1 जून को एक और उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद बाजार लाल निशान में बंद हुआ। मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त और वित्त वर्ष 2023 में ग्रोथ में सुस्ती आने का डर हावी रहा।
1 जून को एक और उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद बाजार लाल निशान में बंद हुआ। मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त और वित्त वर्ष 2023 में ग्रोथ में सुस्ती आने का डर हावी रहा।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 185.24 अंक यानी 0.33 फीसदी की बढ़त के साथ 55,381.17 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 40.60 अंक यानी 0.24 फीसदी की मजबूती के साथ 16,543.95 के स्तर पर बंद हुआ। आज बाजार में लगातार दूसरेदिन गिरावट देखने को मिली।
Geojit Financial Services के विनोद नायर का कहना है कि यूरोपियन यूनियन की तरफ से रूसी तेल पर पाबंदी लगाने के फैसले ने ग्लोबल सेटीमेंट खराब कर दिया। वित्त वर्ष 2022 में इंडियन इकोनॉमी में 8.7 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की लेकिन वित्त वर्ष 2023 में इसके धीमे पड़कर 7.2 फीसदी पर आने की उम्मीद जताई गई है। इस बीच कंस्ट्रक्शन सेक्टर में ग्रोथ आने के चलते ऑटो उत्पादक कंपनियों की तरफ से आज आए आंकड़ों में पैसेजर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट में मजबूती आती दिखी है। हालांकि टू-व्हीलर और ट्रैक्टर सेगमेंट पर दबाव कायम है।
2 जून को कैसे रह सकती है बाजार की चाल
Religare Broking के अजित मिश्रा का कहना है कि तमाम मैक्रो डेटा जारी हो जाने के बाद अब बाजार की दिशा महंगाई की दर और ग्लोबल मार्केट से मिलने वाले संकेत तय करेंगे। मॉनिटरी पॉलिसी के पहले मॉनसून पर आने वाला अपडेट फोकस में रहेगा। इन सब के बीच बाजार में हमारा व्यू बुलिश है। ऐसे में गिरावट पर खरीद की रणनीति की सलाह होगी।
Reliance Securities के मितुल शाह का कहना है कि आरबीआई वित्तीय और मौद्रिक नीतियों के एक और मिलेजुले एक्शन की तैयारी में है। आगे हमें ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होती नजर आ सकती है। इसी महीने आरबीआई और यूएस फेड दोनों की बैठक होने वाली है। कीमतों पर नियत्रंण रखने के लिए भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल के भाव को नियत्रंण में रखने के लिए कुछ कदम उठाए हैं।
अब बाजार की नजर इस बात पर होगी कि केद्रींय बैंक महंगाई को रोकने के लिए क्या तरीका अपनाते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले बदलाव और इंपोर्ट और एक्सपोर्ट ड्यूटी में होने वाले संशोधन मार्केट की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं। इस बीच एफआईआई की तरफ से हो रही लगातार बिकवाली और रुपये में आ रही लगातार गिरावट नियर टर्म में अपना आर्थिक प्रभाव दिखाएगी। ग्लोबल बाजार पर नजर डालें तो रुस-यूक्रेन वार और सप्लाई चेन से जुड़ी दिक्कतें ग्लोबल और भारतीय इक्विटी बाजार पर प्रभाव डालती रहेंगी।
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