कंपनियों ने एंप्लॉयीज से फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के इनवेस्टमेंट प्रूफ मांगने शुरू कर दिए हैं। सवाल है कि एंप्लॉयी को ओल्ड रीजीम में बने रहना चाहिए या नई रीजीम में शिफ्ट करना चाहिए? इसका असर फाइनेंशियल ईयर के दौरान एंप्लॉयी के टैक्स कैलकुलेशन पर पड़ता है। कंपनी का फाइनेंस डिपार्टमेंट इसी आधार पर हर महीने एंप्लॉयी की सैलरी से टीडीएस काटता है।
