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मिनरल्स टैक्स की वजह से आपका मासिक बिजली बिल बढ़ सकता है, जानिए क्यों

सुप्रीम कोर्ट ने हाल में मिनरल्स पर एक बड़ा फैसला दिया। उसने पहले की तारीख से माइनिंग कंपनियों से टैक्स वसूलने का अधिकार राज्यों को दे दिया। इससे राज्यों को अपना रेवेन्यू बढ़ाने का बड़ा मौका मिल गया है। वे बकाया टैक्स की वसूली के लिए माइनिंग कंपनियों को नोटिस भेज सकते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Aug 16, 2024 पर 10:15 AM
मिनरल्स टैक्स की वजह से आपका मासिक बिजली बिल बढ़ सकता है, जानिए क्यों
सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने अपने फैसले में कहा है कि राज्य मिनरल्स पर 1 अप्रैल, 2005 से बकाया रॉयल्टी या टैक्स वसूल सकते हैं।

सुपीर्म कोर्ट ने हाल में मिनरल्स पर टैक्स को लेकर एक बड़ा फैसला दिया था। कोर्ट ने राज्यों को माइनिंग एक्टिविटीज पर पहले की तारीख (जो बीत चुकी है) से टैक्स लगाने की इजाजत दे दी थी। एनालिस्ट्स का कहना है कि इसका व्यापक असर पड़ेगा। यहां तक कि इसका असर आप पर भी पड़ेगा। आपका बिजली का बिल बढ़ जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 14 अगस्त को दिया। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य बगैर इंटरेस्ट टैक्स का अपना बकाया वसूल कर सकते हैं। इस बकाया का भुगतान 12 साल की अवधि में किया जा सकता है। इसकी शुरुआत FY26 से होगी।

मिनरल्स टैक्स क्या है?

एनालिस्ट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले का असर झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में माइनिंग कंपनियों पर पड़ेगा। लोकल बॉडी, राज्य या केंद्र सरकार मिनरल्स (Minerals)पर टैक्स लगाती हैं। यह टैक्स माइन से निकाले गए मिनरल या मिनरल को बेचने पर माइनिंग कंपनी को हुए प्रॉफिट पर लगाया जा सकता है। रॉयल्टी 'नेट' या 'ग्रॉस' रॉयल्टी के रूप में लगाई जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?

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