पिछले पांच वर्षों में सरकार ने टैक्स छूट और रियायतों के जरिए व्यक्तिगत करदाताओं को कॉरपोरेट्स के मुकाबले कहीं ज्यादा राहत दी है। लोकसभा में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, यह फर्क सिर्फ नीतिगत नहीं बल्कि रेवेन्यू के स्तर पर भी साफ नजर आता है।
