अगर आप सोचते हैं कि टैक्स बचाने (Tax Savings) के लिए इनवेस्टमेंट करना जरूरी है तो ऐसा नहीं है। इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के ऐसे कई सेक्शंस हैं, जो डिडक्शंस की इजाजत देते हैं। इससे आपकी टैक्स लायबिलिटी कम हो जाती है। हालांकि, ज्यादातर टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C का इस्तेमाल टैक्स-सेविंग्स के लिए करते हैं। इसके तहत करीब एक दर्जन ऐसे ऑप्शन हैं, जिनमें निवेश कर टैक्स-सेविंग्स की जा सकती है। इनमें PPF, NPS, ELSS, Life Insurance Policies आदि आते हैं। लेकिन, हम आपको टैक्स बचाने के ऐसे रास्तों के बारे में बता रहे हैं, जिनका फायदा उठाने के लिए किसी तरह के इनवेस्टमेंट की जरूरत नहीं है।
इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत ट्यूशन फीस पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। यह सुविधा HUF को नहीं मिलती है। आप दो बच्चों की ट्यूशन फीस पर यह डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं। ट्यूशन फीस का मतलब एक फाइनेंशियल ईयर में चुकाए जाने वाली कुल ट्यूशन फीस से है। अगर आप नौकरी करते हैं तो आपको हर साल जनवरी के पहले या दूसरे हफ्ते तक इनवेस्टमेंट प्रूफ अपनी कंपनी के फाइनेंस डिपार्टेमेंट को देना पड़ता है। आप स्कूल से ट्यूशन फीस पेमेंट सर्टिफिकेट लेकर अपने ऑफिस में दे सकते हैं। इससे आपकी अच्छी टैक्स-सेविंग्स हो जाएगी।
इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 10(16) के तहत एजुकेशन के लिए मिलने वाला स्कॉलरशिप अमाउंट को टैक्स से छूट हासिल है। टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार या किसी ट्रस्ट की तरफ से मिलने वाली स्कॉलरशिप को टैक्स से छूट मिलती है।
राजनीतिक दल/चैरिटेबल ऑर्गेनाइजेशंस को कंट्रिब्यूशन
अगर आप किसी राजनीतिक दल या चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशन को किसी तरह का कंट्रिब्यूशन करते हैं तो उस पर आप टैक्स डिडक्शन का क्लेम कर सकते हैं। डिडक्शन की यह सुविधा इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80GGC के तहत मिलती है।
अगर किसी स्टूडेंट ने एजुकेशन लोन लिया है तो उसके इंटरेस्ट अमाउंट पर डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। इनकम टैक्स के सेक्शन 80E के तहत यह डिडक्शन क्लेम किया जा सकता है। आपको ध्यान सिर्फ यह रखना है कि यह डिडक्शन EMI के सिर्फ इंटरेस्ट वाले हिस्से पर मिलता है। पिंसिपल पर डिडक्शन क्लेम नहीं किया जा सकता।
अगर आप नौकरी करते हैं आर आपको हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) नहीं मिलता है तो आप जो रेंट चुकाते हैं उस पर डिडक्शन क्लेम करने की सुविधा मिलती है। यह डिडक्शन इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80GG के तहत मिलता है। सेल्फ-एंप्लॉयड व्यक्ति भी इस डिडक्शन का दावा कर सकते हैं। इस डिडक्शन का फायदा उठाने के लिए फॉर्म 10BA सब्मिट करना जरूरी है।