GST का 5 साल का लेखा-जोखा : कितना पूरा हुआ लक्ष्य, कितना है अभी बाकी!

डेलॉयट इंडिया के एम एस मणि का कहना है कि One नेशन One टैक्स का जो मकसद था वो कहीं पूरा नहीं हो रहा। हर स्टेट का SGST का रूल अलग है

अपडेटेड Jul 01, 2022 पर 8:01 PM
Story continues below Advertisement
कई आइटम्स के स्लैब्स हर दिन बदलते रहते हैं तो हमें भी कई बार नया स्लैब याद नहीं रहता। इस सप्ताह भी 15 आइटम्स के स्लैब हिला दिए गए

पिछले पांच साल में जीएसटी ने कारोबारियों को टैक्स के मकड़जाल से बाहर तो निकाला है। लेकिन रिफंड में देरी औऱ रिटर्न की मौजूदा प्रक्रिया से नई मुश्किलें पैदा हो गई हैं। जिन्हें दूर करना इस वक्त की सबसे बड़ी चुनौती है।

आशीष गुजराल नोएडा की अपनी इस फैक्ट्री से गारमेंट बनाते हैं और पिछले दो दशक से यूरोप और अमेरिका समेत कई देशों में एक्सपोर्ट कर रहे हैं। आज से 5 साल पहले जब जीएसटी लागू हुआ था तो बाकी कारोबारियों की तरह इन्हें भी काफी उम्मीदें जगी थीं। इनकी उम्मीदों पर जीएसटी खरा भी उतरा और एक आसान टैक्स प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन अभी भी थोड़ी समस्याएं बची हैं ।

आशीष गुजराल ने सीएनबीसी-आवाज़ से बात करते हुए कहा कि थोड़ी बहुत समस्या है। हमारे कुछ सप्लायर मंथली फाइल करते हैं तो कुछ क्वार्टरली। इससे हमें तकलीफ होती है। ITC आखिरकार मिल जाता है लेकिन रिफंड मिलने में कुछ समय के लिए दिक्कत हो जाती है। सबके लिए मंथली सिस्टम हो तो अच्छा है। बाकी प्रोसेस स्मूथ है।


सिर्फ गुजराल ही नहीं देश के लाखों कारोबारियों ऐसी ही कुछ और चुनौतियों से गुजर रहे हैं। एक और एक्सपोर्टर नीरज खेमका ने सीएनबीसी-आवाज़ से कहा कि शुरू- शुरू में परेशानियां थोड़ा ज्यादा थीं लेकिन अब हम भी सीख चुके हैं। कई आइटम्स के स्लैब्स हर दिन बदलते रहते हैं तो हमें भी कई बार नया स्लैब याद नहीं रहता। इस सप्ताह भी 15 आइटम्स के स्लैब हिला दिए गए। फाइल करते वक़्त पुराने स्लैब से मैच करने में दिक्कत होती है। ऐसी दिक्कतें ज्यादा हैं।

Windfall Tax : ONGC के पूर्व सीएमडी ने कहा रिफाइनिंग कंपनियों पर इतना बोझ डालना ठीक नहीं

मामला सिर्फ ITC रिफंड में देरी का नहीं है। एक देश एक टैक्स के सपने को साकार करते इस जीएसटी में आज भी एक राज्य का इनपुट टैक्स क्रेडिट दूसरे राज्य के साथ एडजस्ट नहीं कर सकते हैं। यानी एक कारोबारी ने अगर कच्चा माल एक राज्य से खऱीदा है तो उसे उसी राज्य में बेचे गए तैयार माल के एवज में इसे एडजस्ट करना होगा।

डेलॉयट इंडिया के एम एस मणि का कहना है कि One नेशन One टैक्स का जो मकसद था वो कहीं पूरा नहीं हो रहा। हर स्टेट का SGST का रूल अलग है। एक स्टेट का टैक्स दूसरे स्टेट में एडजस्ट नहीं हो रहा है। मैन्युफैक्चरर और डीलर को उतना itc नहीं मिल रहा जितना उसकी आउटपुट लायबिलिटी है। एक समय में तो हमें इसका ऑब्जेक्टिव रखना होगा।

अगर एक से ज्यादा राज्यों में कारोबार करते हैं तो चुनौती और बड़ी है। खास तौर से बैंक जैसे सर्विस प्रोवाइडर के लिए। पहले जहां पूरे साल में 2 रिटर्न फाइल करना होता था अब 24 रिटर्न फाइल करने होते हैं। अब सिर्फ टैक्स पेयर्स ही नहीं बल्कि सरकार को भी एहसास है कि अगले चऱण में इन चुनौतियों से निपटना होगा।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।