सैलरी बढ़ना हर किसी को अच्छा लगता है। लेकिन सोचिए, अगर आपकी कमाई सिर्फ 1 लाख रुपये बढ़े और बदले में टैक्स 1 लाख से भी ज्यादा देना पड़ जाए, तो कैसा लगेगा? सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन 1 करोड़ रुपये के आसपास कमाने वाले कई लोगों के साथ ऐसा सच में हो सकता है। दरअसल, भारत के इनकम टैक्स सिस्टम में 1 करोड़ रुपये की इनकम पार करते ही टैक्स का गणित अचानक बदल जाता है। यही वजह है कि कई बार छोटी सी सैलरी हाइक भी भारी टैक्स बोझ बन जाती है।
1 करोड़ पार करते ही बदल जाता है टैक्स का खेल
अगर किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम 50 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच है, तो उसे टैक्स पर 10% सरचार्ज देना पड़ता है। लेकिन जैसे ही इनकम 1 करोड़ से ऊपर जाती है, सरचार्ज बढ़कर 15% हो जाता है। यही 5% का फर्क टैक्स को अचानक काफी ज्यादा बढ़ा देता है। खास बात यह है कि सरचार्ज सीधे इनकम पर नहीं, बल्कि कुल टैक्स पर लगता है। इसलिए थोड़ा सा ज्यादा कमाने पर भी टैक्स में बड़ा उछाल आ जाता है।
उदाहरण से समझिए पूरा मामला
मान लीजिए किसी व्यक्ति की टैक्सेबल इनकम ठीक 1 करोड़ रुपये है। ऐसे में उसका कुल टैक्स करीब 29.51 लाख रुपये बनता है। अब अगर उसकी इनकम सिर्फ 1 लाख बढ़कर 1.01 करोड़ रुपये हो जाए, तो टैक्स करीब 30.55 लाख रुपये पहुंच जाता है। यानी सिर्फ 1 लाख ज्यादा कमाने पर लगभग 1.04 लाख रुपये अतिरिक्त टैक्स देना पड़ सकता है। यही वजह है कि लोग कहते हैं कि ज्यादा कमाया, लेकिन हाथ में कम बचा।
इसकी सबसे बड़ी वजह सरचार्ज स्लैब है। 1 करोड़ की लिमिट पार करते ही टैक्स पर ज्यादा सरचार्ज लगने लगता है। इसलिए टैक्स का आंकड़ा तेजी से बढ़ जाता है। हालांकि सरकार ने इससे राहत देने के लिए मार्जिनल रिलीफ का नियम भी रखा है।
मार्जिनल रिलीफ एक तरह की सुरक्षा है, ताकि टैक्स अचानक बहुत ज्यादा न बढ़ जाए। अगर आपकी इनकम थोड़ी सी बढ़ती है, तो सरकार कोशिश करती है कि टैक्स उससे बहुत ज्यादा न बढ़े। इसी वजह से कुछ राहत दी जाती है।
ऊपर बताए उदाहरण में भी टैक्सपेयर को करीब 63,500 रुपये की राहत मिली थी। अगर यह राहत नहीं मिलती, तो टैक्स और ज्यादा बढ़ सकता था। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि हेल्थ और एजुकेशन सेस पर यह राहत नहीं मिलती। इसलिए पूरी तरह टैक्स से लगने वाला खत्म नहीं होता।
नौकरीपेशा लोग कैसे बचा सकते हैं टैक्स?
टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि 1 करोड़ के आसपास सैलरी पाने वाले लोगों को पहले से टैक्स प्लानिंग करनी चाहिए। इसके लिए कॉरपोरेट NPS एक अच्छा विकल्प माना जा रहा है। Section 80CCD(2) के तहत अगर कंपनी कर्मचारी के NPS अकाउंट में योगदान करती है, तो उसका फायदा टैक्स बचाने में मिल सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक कंपनी बेसिक सैलरी का 14% तक NPS में योगदान दे सकती है और इस रकम पर टैक्स छूट मिलती है।
मान लीजिए आपकी टैक्सेबल इनकम 1.01 करोड़ रुपये है। अगर कंपनी की तरफ से 1 लाख रुपये Corporate NPS में जमा हो जाए, तो आपकी टैक्सेबल इनकम फिर से 1 करोड़ के आसपास आ सकती है। इससे आप दोबारा 10% वाले सरचार्ज स्लैब में आ सकते हैं और ज्यादा टैक्स देने से बच सकते हैं। सिर्फ ज्यादा कमाना ही जरूरी नहीं है, बल्कि सही टैक्स प्लानिंग करना भी उतना ही अहम है। खासकर हाई इनकम वाले लोगों के लिए छोटी सी सैलरी हाइक भी बड़ा टैक्स झटका बन सकती है।