इनकमट टैक्स पेयर्स को एक और झटका लग सकता है। डिडक्शन वाली इनकनम टैक्स की पुरानी व्यवस्था खत्म हो सकती है। रेवेन्यू सेक्रेटरी तरूण बजाज ने इसका संकेत दिया है। उन्होंने शनिवार को कहा कि इनकम टैक्स की पुरानी व्यवस्था का अट्रैक्शन घटाने की जरूरत है जिससे ज्यादा लोग इनकम टैक्स की नई व्यवस्था को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
इनकम टैक्स की नई व्यवस्था 2020 में शुरू हुई थी। इसमें टैक्स की दर कम है, लेकिन डिडक्शन की सुविधा नहीं मिलती है। इस नई व्यवस्था में टैक्सपेयर्स ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है। ज्यादातर टैक्सपेयर्स पुरानी व्यवस्था के साथ ही अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते हैं।
बजाज ने 2nd TIOL National Taxation Awards 2021 & TIOL Tax Congress में यह बात कही। वित्त वर्ष 2020-21 के बजट में सरकार ने टैक्स की नई व्यवस्था पेश की थी। उसने उसे ज्यादा सिंपल बताया था। इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए इसमें टैक्स रेट कम है। लेकिन, उन्हें स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 80सी की सुविधा नहीं मिलती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन और सेक्शन 80सी की सुविधा से टैक्स का बोझ कम हो जाता है। इधर, नई व्यवस्था में 5 से 7.5 लाख रुपये सालाना इनकम वाले टैक्सपेयर्स को 10 फीसदी टैक्स देना पड़ता है। पुरानी व्यवस्था में इतनी इनकम पर 20 फीसदी टैक्स देना पड़ता है। हालांकि, सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट के चलते सालाना 5 लाख रुपये तक की इनकम वाले लोगों को नई या पुरानी व्यवस्था में कोई टैक्स नहीं देना पड़ता है।
बजाज ने कहा कि सरकार ने पर्सनल इनकमट टैक्स में कमी लाने के लिए नई व्यवस्था पेश की थी। लेकिन, बहुत कम लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। इसकी वजह यह है कि लोगों को लगता है कि किसी व्यवस्था में वह 50 रुपये भी कम टैक्स चुकाएंगे तो वे उसी व्यवस्था का इस्तेमाल करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इंडिया में 80सी और स्टैंडर्ड डिडक्शन का इस्तेमाल करने वाले 8-8.5 लाख सालाना इनकम वाले लोगों को कोई टैक्स नहीं चुकाना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि लोग नई व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। इसलिए जब तक हम पुरानी व्यवस्था का आकर्षण नहीं घटाएंगे, लोग नई व्यवस्था को अपनाने के लिए आने नहीं आएंगे। और जब तक हम ऐसा नहीं करेंग, हम अपने टैक्स रेट्स को आसान नहीं बना सकेंगे।