Income Tax Return: ज्यादा से ज्यादा रिफंड हासिल करने के लिए कारगर टिप्स

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई लोगों को यह गलतफहमी है कि फॉर्म 16 में दिखाई गई रकम से ज्यादा टैक्स नहीं बचाया जा सकता। हालांकि, सचाई यह है कि फॉर्म 16 ही संभावित बचत का जरिया नहीं हो सकता। रिटर्न फाइल करने से पहले 26AS, एन्युअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में इनकम का ब्यौरा देखना जरूरी है

अपडेटेड Jul 16, 2023 पर 7:29 PM
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फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।

फाइनेंशियल ईयर 2022-23 (असेसमेंट ईयर 2023-24) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। इस सिलसिले में 15 जुलाई को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का ट्वीट कुछ इस तरह था, 'असेसमेंट ईयर 2023-24 के लिए #ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2023 है। फौरन रिटर्न फाइल करें (#FileNow) और बेफिक्र होकर वीकेंड बिताएं।'

अगर टैक्सपेयर्स ने टैक्स के तौर पर बकाया राशि से ज्यादा टैक्स चुकाया है, तो उन्हें रिफंड मिलेगा। रिफंड की रकम का कैलकुलेशन ITR फाइल करते वक्त किया जाता है और टैक्स विभाग द्वारा इनकम टैक्स रिटर्न को प्रोसेस करने के बाद संबंधित रकम असेसी के खाते में जमा कर दी जाती है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कई लोगों को यह गलतफहमी है कि फॉर्म 16 (Form 16) में दिखाई गई रकम से ज्यादा टैक्स नहीं बचाया जा सकता। हालांकि, सचाई यह है कि फॉर्म 16 ही संभावित बचत का जरिया नहीं हो सकता। रिटर्न फाइल करने से पहले 26AS, एन्युअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) में इनकम का ब्यौरा देखना जरूरी है। साथ ही, यह भी देखें कि 26AS में आपका टीडीएस (TDS) दिख रहा है या नहीं, ताकि जरूरत पड़ने पर टीडीएस को टैक्स लाइबिलिटी के हिसाब से एडजस्ट किया जा सके।

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हम आपको यहां ज्यादा से ज्यादा टैक्स रिफंड हासिल करने के लिए कुछ कारगर टिप्स दे रहे हैं

(1) ITR समय पर फाइल करें

पेनाल्टी से बचने के लिए सही समय पर रिटर्न फाइल करना जरूरी है और ज्यादा से ज्यादा रिफंड लेने का यह आसान तरीका है। टैक्सपेयर के लिए इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 139(1) के मुताबिक तय तारीख तक रिटर्न फॉर्म सबमिट करना जरूरी है। तय तारीख के बाद रिटर्न भरने वालों को जुर्माना देना होगा।

(2) टैक्स पेमेंट का सही विकल्प चुनें

टैक्सपेयर्स को वह विकल्प चुनना होगा, जिसके तहत वे अपना ITR फाइल करना चाहते हैं। आपको अपनी जरूरतों के हिसाब से टैक्स चुकाने का विकल्प चुनना चाहिए। अगर आपके पास पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), इंश्योरेंस पॉलिसी या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS), होम लोन या हेल्थ इंश्योरेंस जैसे लॉन्ग टर्म निवेश नहीं हैं, तो नई टैक्स व्यवस्था आपके लिए बेहतर विकल्प होगी।

(3) अपने ई-रिटर्न की पुष्टि करें

ITR भरने के 30 दिनों के भीतर रिटर्न का वेरिफिकेशन जरूरी है। अगर रिटर्न का वेरिफिकेशन नहीं होता है, तो यह मान्य नहीं होगा और अगर रिटर्न भरने की आखिरी तारीख बीत नहीं गई है, तो टैक्सपेयर को फिर से ITR भरना होगा। टैक्स रिटर्न के ऑनलाइन वेरिफिकेशन के 6 तरीके हैं, जिनमें आधार के साथ लिंक किए गए मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP के अलावा, नेट बैंकिंग, बैंक अकाउंट के जरिये इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) और बैंक ATM से EVC हासिल करना जैसे उपाय शामिल हैं।

(4) छूट क्लेम करें

टैक्सपेयर्स को उन छूटों को क्लेम करना चाहिए, जिनके वे हकदार हैं। इससे आपकी टैक्स जिम्मेदारी कम होगी और रिफंड की राशि बढ़ेगी। PPF, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), लाइफ और मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम और होम लोन पर दिए जाने वाले ब्याज पर छूट मिलती है। किसी शख्स को सिर्फ फॉर्म 16 में मौजूद कटौतियों को नहीं गिनना चाहिए। कई बार टैक्स बचत से जुड़े कई खर्चों का जिक्र फॉर्म 16 में नहीं होता। उदाहरण के लिए बच्चों की ट्यूशन फीस। ITR भरते समय टैक्स बचत वाले खर्चों और निवेश की फिर से जांच करना बेहतर आइडिया है।

(5) बैंक अकाउंट वैलिडेट करें

अपने बैंक अकाउंट को वैलिडेट करें और यह सुनिश्चित करें कि इनकम टैक्स रिटर्न पोर्टल पर इसे सही तरीके से वेरिफाई किया गया है। वैलिडेशन प्रोसेस जरूरी है, क्योंकि टैक्स विभाग सिर्फ उन खातों में रिफंड जमा करता है जो ई-फाइलिंग पोर्टल पर वैलिडेट किए गए हों। रिटर्न फाइल करने से पहले वैलिडेशन जरूरी है।

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