ITR Filing: 31 दिसंबर से पहले निपटा लें अपना टैक्स रिटर्न, नहीं तो बाद में पड़ेगा पछताना

अगर आपने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है या रिटर्न फाइल करने में कोई गड़बड़ी हो गई है, तो 31 दिसंबर से पहले अपना रिटर्न फाइल करना या इसमें संशोधन करना नहीं भूलें। पिछले कुछ साल में देरी से या संशोधित रिटर्न फाइल करने से जुड़ी समयसीमा पहले के मुकाबले कम हुई है

अपडेटेड Jan 12, 2024 पर 7:36 PM
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देरी से ITR भरने या इसमें संशोधन करने के बाद इसका वेरिफिकेशन भी जरूरी होता है।

अगर आपने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल नहीं किया है या रिटर्न फाइल करने में कोई गड़बड़ी हो गई है, तो 31 दिसंबर से पहले अपना रिटर्न फाइल करना या इसमें संशोधन करना नहीं भूलें। पिछले कुछ साल में देरी से या संशोधित रिटर्न फाइल करने से जुड़ी समयसीमा पहले के मुकाबले कम हुई है। अब देरी से रिटर्न भरने या इसमें संशोधन की समयसीमा घटाकर संबंधित असेसमेंट ईयर की 31 दिसंबर कर दी गई है।

समयसीमा का पालन नहीं करने पर पेनाल्टी लगाई जा सकती है। इसके अलावा, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा अन्य कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, आपके पास इसके बाद भी 31 मार्च, 2025 तक फॉर्म ITR-U में अपडेटे रिटर्न भरने का विकल्प होगा। इसके तहत कुल टैक्स और इस पर बकाया ब्याज पर अतिरिक्त 25 पर्सेंट टैक्स देना होगा। बहरहाल, अगर आप अपना ITR भर रहे हैं या इसमें संशोधन कर रहे हैं, तो इन बातों को ध्यान में रखना नहीं भूलें:

1. अपने AIS की समीक्षा करें


AIS में कई स्रोतों से जुड़ी जानकारी होती है और यह टैक्सपेयर्स की विभिन्न स्रोतों से होने वाली टैक्स इनकम के बारे में जानने और टैक्स चोरी का पता लगाने का अहम टूल है, मसलन इसमें बैंक से मिलने वाले ब्याज और स्टॉक मार्केट ट्रांजैक्शंस आदि की जानकारी होती है। AIS ऐसा स्टेटमेंट है, जो जरूरी सूचनाओं के साथ अपडेट होता रहता है। अगर आप वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पहले ही इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर चुके हैं, तो इस बात की काफी संभावना है कि आपके AIS में कुछ नई सूचना आ जाए। ऐस स्थिति में आप AIS में मौजूद सूचना से अपने ITR का मिलान कर सकते हैं। इसके बाद अगर जरूरत पड़े, तो ITR में संशोधन भी कर सकते हैं। इनकम टैक्स के ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉग इन कर आप अपना AIS देख सकते हैं।

2. 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन करें

देरी से ITR भरने या इसमें संशोधन करने के बाद इसका वेरिफिकेशन भी जरूरी होता है। इसका वेरिफिकेशन इलेक्ट्रॉनिक तरीके से या इनकम टैक्स सीपीसी को फिजिकल कॉपी भेज कर किया जा सकता है। अगर आप अपना रिटर्न भरने के 30 दिनों के भीतर इसका वेरिफिकेशन नहीं करते हैं, तो वेरिफिकेशन की तारीख को ही ITR भरने की तारीख माना जाएगा। वेरिफिकेशन में 31 दिसंबर के बाद हुई देरी ITR को इनवैलिड कर देगी। इस वजह से आपको इनकम टैक्स कानून के तहत पेनाल्टी भी देना पड़ सकती है।

3. रिटर्न में देरी के लिए भुगतान और ब्याज

अगर ITR तय समयसीमा के भीतर नहीं भरा जाता है, तो आपको लेट फाइलिंग फीस देनी होगी। कुल इनकम 5 लाख से कम रहने पर यह फीस 1,000 रुपये है, जबकि 5 लाख रुपये से ऊपर की आमदनी पर लेट फीस के तौर पर 5,000 रुपये का भुगतान करना होगा। अगर टैक्स भी बकाया है, तो इनकम टैक्स कानून के सेक्शन 234ए और 234सी के तहत ब्याज का भुगतान होगा।

4. इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों पर कार्रवाई का भी प्रावधान

इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 276सीसी के तहत इनकम टैक्स रिटर्न नहीं भरने पर सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है। अगर टैक्स चोरी 25 लाख रुपये से ज्यादा है, तो 6 महीने से 7 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। बाकी मामलों में 3 महीने से लेकर 2 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अगर टैक्स की बकाया राशि 10,000 से कम है, तो टैक्सपेयर पर मुकदमा दर्ज नहीं होगा।

हाल के वर्षों में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट टैक्स रिटर्न नहीं भरने वालों के खिलाफ काफी सख्त हो गया है। चूंकि रिटर्न भरने की आखिरी तारीख नजदीक है, लिहाजा अगर आपने रिटर्न नहीं भरा है या इसमें कोई गड़बड़ी छूट गई है, तो इसे अंजाम देकर इनकम टैक्स के नोटिस से बचने का यह आखिरी मौका है।

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