New Income Tax Regime : अगर कोई बिलेटेड रिटर्न फाइल करता है तो वह नए टैक्स रेजीम के बेनिफिट नहीं ले सकता। नए टैक्स रेजीम के निर्देशों स्पष्ट उल्लेख है कि इसके बेनिफिट्स का दावा करने के लिए डेडलाइन के भीतर रिटर्न फाइल करना होता है।
New Income Tax Regime : अगर कोई बिलेटेड रिटर्न फाइल करता है तो वह नए टैक्स रेजीम के बेनिफिट नहीं ले सकता। नए टैक्स रेजीम के निर्देशों स्पष्ट उल्लेख है कि इसके बेनिफिट्स का दावा करने के लिए डेडलाइन के भीतर रिटर्न फाइल करना होता है।
टैक्सपेयर्स 31 जुलाई की निर्धारित तारीख बीतने के बाद भी रिटर्न फाइल कर सकते हैं, लेकिन जिन लोगों ने कम टैक्स रेट की पेशकश करने वाले नए टैक्स सिस्टम को अपनाया है तो उन्हें इस मामले में कोई राहत नहीं दी गई है।
2020 में पेश किया था नया इनकम टैक्स रेजीम
पहली बार 1 फरवरी, 2020 को आम बजट घोषित नया इनकम टैक्स रेजीम (new income tax regime) कर की कम दर की पेशकश करता है, जिसमें 76 टैक्स डिडक्शंस के लिए कोई दावा नहीं किया जा सकता।
इस नए रेजीम के लागू होने के पहले साल 2020-21 में कई लोगों ने इस विकल्प को अपनाया था। लेकिन कोविड-19 के चलते रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख बढ़ा दी गई थी।

डेडलाइन बढ़ने के भ्रम में रहे टैक्सपेयर्स
इस प्रकार, नए टैक्स रेजीम को अपनाने वाले टैक्स फाइलिंग की डेडलाइन की बढ़ोतरी के इंतजार के भ्रम में बने रहे। कम टैक्स रेजीम के बेनिफिट्स का दावा करने के लिए, उन्हें निश्चित तारीख तक रिटर्न फाइल करना था।
केपीबी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर पारस सावला ने कहा, “अगर कोई बिलेटेड रिटर्न फाइल करता है तो वह नए टैक्स रेजीम के बेनिफिट नहीं ले सकता। नए टैक्स रेजीम के निर्देशों स्पष्ट उल्लेख है कि इसके बेनिफिट्स का दावा करने के लिए डेडलाइन के भीतर रिटर्न फाइल करना होता है।”
सेल्फ- इम्प्लॉइड के लिए, अगर उन्होंने नया रेजीम अपनाया है तो यह उनको लाइफटाइम के लिए उपलब्ध है। उन्हें ऑप्शन चुनने के बाद एक बार ही इसे बदलने का अवसर मिलता है। वहीं सैलरीड लोग हर साल ऐसा कर सकते हैं।
पेनाल्टी और ज्यादा कर
देरी के लिए 5,000 रुपये के पेनाल्टी के अलावा, लेट फाइलर्स को इस साल अतिरिक्त टैक्स भी देना होगा। मनोहर चौधरी एंड एसोसिएट्स में पार्टनर अमीत पटेल ने कहा, “जो भी टीडीएस काटा गया है, व्यक्ति की आय के स्तर और वित्त वर्ष के दौरान किए गए निवेश के आधार पर व्यवस्था में बदलाव के चलते कमी हो सकती है।”
अगर कोई अतिरिक्त कर देनदारी बनती है तो टैक्सपेयर द्वारा मौजूदा टैक्स रेजीम के इस्तेमाल के चलते इसका भुगतान करना होगा।
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