सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने विदेश जाने के लिए इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट (ITCC) जरूरी करने को लेकर चल रही अटकलों के बारे में स्पष्टीकरण जारी किया है। हालिया रिपोर्ट के उलट, सभी नागरिकों के लिए विदेश जाने से पहले इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट लेना जरूरी नहीं है। दरअसल, इस सिलसिले में फाइनेंस एक्ट, 2003 के जरिये प्रावधान किया गया था और इसमें उन परिस्थितियों का जिक्र है, जब भारत में रहने वाले शख्स के लिए टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट लेना जरूरी हो जाता है।
हालिया संशोधन में सिर्फ ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी इनकम और संपत्तियां) और टैक्स एक्ट, 2015 को संदर्भ जोड़कर यह सुनिश्चित किया गया है कि इस एक्ट के तहत लाइबिलिटीज को इनकम टैक्स एक्ट के दायरे के तहत आने वाली लाइबिलिटीज की तरह माना जाएगा। CBDT ने साफ किया है कि ITCC का नियम खास परिस्थितियों में ही लागू होता है।
मौजूदा प्रावधानों और निर्देशों के मुताबिक, इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट सिर्फ उन लोगों के लिए जरूरी होगा, जिनके खिलाफ वित्तीय गड़बड़ियों से जुडे़ गंभीर मामले चल रहे हैं या जिनके पास डायरेक्ट टैक्स के तहत 10 लाख रुपये का बकाया है और इस पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। यह रेगुलेशन 2003 से चल रहा है और हालिया संशोधन से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है।
CBDT के नोटिफिकेशन में यह भी गया है कि इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए वजहों के बारे में बताना होगा और इसकी मंजूरी प्रिंसिपल चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स या चीफ कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स से मिलेगी। मोटे तौर पर CBDT का साफ तौर पर कहना है कि इनकम टैक्स क्लियरेंस सर्टिफिकेट विदेश जाने वाले सभी भारतीयों के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि बड़ी वित्तीय गड़बड़ियों में फंसे लोगों को ही इसकी जरूरत हो सकती है।