अब प्लास्टिक कार्ड के जरिए एक लिमिट तक विदेशों में पेमेंट कर रहे हैं तो इस पर TCS (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) नहीं लगेगा। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को इससे जुड़े नियमों की जानकारी दी। इसके तहत अगर एक वित्त वर्ष में डेबिट या क्रेडिट कार्ड से यहां से विदेश में 7 लाख रुपये तक भेजते हैं तो इस पर टीसीएस नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह प्रावधान लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) और टीसीएस लगाने के नियमों में अस्पष्टता दूर करने के लिए लिया गया है। इस हफ्ते की शुरुआत में मंत्रालय ने इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड से जुडे़ खर्च को आरबीआई के एलआरएस के तहत लाया था। इसके चलते इन खर्चों पर 20 फीसदी का टीसीएस लगने का तीखा विरोध हुआ। इसके बाद वित्त मंत्रालय को इस पर स्पष्टता देनी पड़ी।
मार्च में आया था एलआरएस में लाने का प्रावधान
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मार्च में फाइनेंस बिल 2023 पेश किया था। उन्होंने इसे पेश करते हुए कहा था कि आरबीआई को विदेशी दौरों पर क्रेडिट कार्ड से भुगतान को एलआरएस के तहत लाने के लिए कोई रास्ता निकालना चाहिए। उनका कहना था कि विदेशी दौरों पर क्रेडिट कार्ड से पेमेंट एलआरएस के तहत नहीं होता है तो इन पर टीसीएस नहीं लग पाता है। इस साल के बजट में एलआरएस के तहत 1 जुलाई 2023 से पढ़ाई और इलाज को छोड़कर यहां से किसी देश देश को पैसा भेजने पर 20% टीसीएस का प्रस्ताव पेश किया गया था।
वित्त मंत्रालय ने किसी भी प्रक्रियात्मक अस्पष्टता से बचने के लिए फैसला लिया है कि एक वित्त वर्ष में क्रेडिट कार्ड से विदेशों में 7 लाख रुपये तक के पेमेंट को एलआरएस लिमिट्स से बाहर कर दिया गया है और ऐसे में अब इस पर टीसीएस नहीं लगेगा। इससे पहले क्या था कि विदेशों में इलाज और पढ़ाई पर 7 लाख रुपये तक के पेमेंट पर ही टीसीएस से राहत थी और बाकी किसी भी खर्च पर 5 फीसदी की दर से टीसीएस लगता था।