क्या आपको भी मिला है इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का SMS? जानें क्या हैं इसके मायने

कुछ टैक्सपेयर्स ने इस मैसेज का गलत मतलब निकाल लिया है और वे यह अनुमान लगा रहे हैं कि उनके पास टैक्स डिपार्टमेंट का और बकाया है। दरअसल, इस एसएमएस अलर्ट की शुरुआत 2016 के आखिर में की गई थी और इसका मकसद टैक्सपेयर्स को उनकी कुल कटौती से अवगत कराना था। यह एक बेहतर टूल है, जिससे लोग अपने ऑफिस की सैलरी स्लिप से मैसेज में दिए गए ब्यौरे का मिलान कर सकते हैं

अपडेटेड Apr 15, 2024 पर 8:30 PM
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वेतनभोगी लोगों को वित्त वर्ष 2023-24 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए जून के मध्य तक इंतजार करना होगा।

कुछ वेतनभोगी टैक्सपेयर्स को टीडीएस (TDS) के बारे में मैसेज मिला है। SMS के जरिये भेजे गए इस मैसेज में वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान एंप्लॉयर द्वारा काटे गए टैक्स (टीडीएस) का ब्यौरा दिया गया है। इस मैसेज में कहा गया है, 'पैन नंबर xxx के एंप्लॉयर द्वारा 31 दिसंबर को खत्म तिमाही में कुल TDS ₹xxx है, जबकि वित्त वर्ष 2023-24 के लिए कुल TDS ₹xxx है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीम का मकसद पिछली तिमाही और पिछले फाइनेंशियल ईयर के दौरान जमा किए गए टीडीएस के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है।'

हालांकि, कुछ टैक्सपेयर्स ने इस मैसेज का गलत मतलब निकाल लिया है और वे यह अनुमान लगा रहे हैं कि उनके पास टैक्स डिपार्टमेंट का और बकाया है। दरअसल, इस एसएमएस अलर्ट की शुरुआत 2016 के आखिर में की गई थी और इसका मकसद टैक्सपेयर्स को उनकी कुल कटौती से अवगत कराना था। यह एक बेहतर टूल है, जिससे लोग अपने ऑफिस की सैलरी स्लिप से मैसेज में दिए गए ब्यौरे का मिलान कर सकते हैं।

15 जून तक करें इंतजार

वेतनभोगी लोगों को वित्त वर्ष 2023-24 का इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए जून के मध्य तक इंतजार करना होगा, क्योंकि इसी समय एंप्लॉयर्स फॉर्म 16 जारी करते हैं। नियमों के मुताबिक, एंप्लॉयर्स को हर साल फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के बाद 15 जून से पहले फॉर्म 16 जारी करना चाहिए। हालांकि, जल्दी रिटर्न फाइल करने को उत्सुक टैक्सपेयर्स इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ई-फाइलिंग पोर्टल का इस्तेमाल कर ऐसा कर सकते हैं। हालांकि, इस विकल्प के बावजूद एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिटर्न फाइल करते वक्त 26AS और AIS को अपडेट करना जरूरी है।


एंप्लॉयर्स द्वारा जारी किए जाने वाले सर्टिफिकेट में ITR फाइलिंग से जुड़ी जरूरी जानकारी होती है, जिनमें TDS और टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (TCS) समेत एंप्लॉयर और एंप्लॉयी के बीच हुए ट्रांजैक्शंस का ब्यौरा होता है।

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