टैक्स अधिकारियों ने इस साल करीब 40,000 करोड़ रुपये की GST चोरी पकड़ी है। अधिकारियों ने बताया ये फर्जी चालान और इनपुट टैक्स क्रेडिट के फर्जी क्लेम करके ये टैक्स चोरी की गई।
टैक्स अधिकारियों ने इस साल करीब 40,000 करोड़ रुपये की GST चोरी पकड़ी है। अधिकारियों ने बताया ये फर्जी चालान और इनपुट टैक्स क्रेडिट के फर्जी क्लेम करके ये टैक्स चोरी की गई।
इस तरह के फ्रॉड को रोकने और इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार 1 जनवरी से कई नए नियम लागू करने जा रही हैं। हालांकि सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ये नियम इस तरह से नहीं होंगे कि इनका ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पर प्रभाव पड़े।
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल बोर्ड ऑप इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBITC) ने डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ GST इंटेलीजेंस और सेंट्रल GST की विभिन्न संस्थाओं के सात मिलकर देशभर में इनफोर्समेंट अभियान छेड़ा था। इस अभियान के तहत टैक्स चोरी के 5,700 से अधिक केस सामने आए, जिनके जरिए करीब 40,000 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी की गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक GST कानून के तहत लागू होने वाले नए उपायों का उद्देश्य इस तरह की धोखाधड़ी से निपटना और उस प्राप्तकर्ता की रक्षा करना है जो हमेशा यह जांचने की स्थिति में नहीं होता है कि उसके सप्लायर्स ने टैक्स का भुगतान किया है या नहीं। अभी के नियमों के तहत, जब सप्लायर टैक्स का भुगतान नहीं करता है, तो प्राप्तकर्ता को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करने में मुश्किल होती है।
एक अधिकारी ने बताया, "नए उपाय किसी भी तरह से ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की पहल से समझौता नहीं करेंगे। इनमें से अधिकतर बदलाव इनपुट क्रेडिट के दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से हैं और सही दिशा में हैं।"
एक अकाउंटिंग फर्म के एक्सपर्ट ने बताया कि कई बड़ी कंपनियों ने पहले से ही केवल मिलान वाले क्रेडिट का क्लेम करने का सिस्टम लागू कर दिया है। यह अब दूसरों को भी पालन करना होगा। ट्रांजैक्शन की संख्या बहुत अधिक होने पर इसके लिए मजबूत तकनीकी समाधानों के इस्तेमाल की आवश्यकता होती है। उन्होंने आगे कहा कि फिलहाल बायर्स के लिए यह पता लगाने के लिए कोई सिस्टम नहीं है कि उसके सप्लायर्स ने वास्तव में टैक्स का भुगतान किया है या नहीं।
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