TCS Layoffs: कंपनी छोड़ने से पहले ग्रुप हेल्थ पॉलिसी को रिटल पॉलिसी में कनवर्ट करा सकते हैं, जानिए इसके फायदें

अगर कंपनी की तरफ से मिलने वाली ग्रुप हेल्थ पॉलिसी में एंप्लॉयीज के मातापिता भी शामिल हैं तो यह बहुत फायदेमंद है। ऐसे में ग्रुप हेल्थ पॉलिसी को रिटेल हेल्थ पॉलिसी में स्विच करना काफी फायदेमंद हो सकता है। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां बुजुर्गों को हेल्थ पॉलिसी ऑफर करने में दिलचस्पी नहीं दिखाती हैं

अपडेटेड Jul 31, 2025 पर 3:19 PM
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आप अपने एचआर डिपार्टमेंट से ग्रुप पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में माइग्रेट करने के प्रोसेस के बारे में पूछ सकते हैं।

टीसीएस ने 12,000 से ज्यादा एंप्लॉयीज की छंटनी का प्लान बनाया है। इससे न सिर्फ आईटी कंपनियों के एंप्लॉयीज के बीच चिंता बढ़ गई है बल्कि दूसरे सेक्टर की कंपनियों के एंप्लॉयीज भी टेंशन में हैं। नौकरी खत्म होते ही कई तरह की सुविधाएं मिलनी बंद हो जाती हैं। इनमें ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस कवर भी शामिल है। यह हेल्थ कवर खासकर उन एंप्लॉयीज के लिए काफी अहम है, जिनके मातापिता काफी बुजुर्ग हैं।

कई कंपनियां ग्रुप हेल्थ पॉलिसी में मातापिता को कवर करने की सुविधा देती हैं

कई कंपनियां अब भी एंप्लॉयीज की ग्रुप हेल्थ पॉलिसी में मातापिता को भी कवर करने की सुविधा देती हैं, जबकि कुछ कंपनियों की ग्रुप हेल्थ पॉलिसी में सिर्फ एंप्लॉयीज उसकी पत्नी और बच्चों को कवर मिलता है। अगर आपकी कंपनी एंप्लॉयीज के साथ उसके मातापिता को भी हेल्थ कवरेज देती है तो यह आपके लिए काफी फायदेमंद है। इसकी वजह यह है कि सीनियर सिटीजंस के लिए हेल्थ पॉलिसी खरीदना काफी मुश्किल काम है।


इंश्योरेंस कंपनियां बुजुर्गों को हेल्थ पॉलिसी इश्यू करने में दिलचस्पी नहीं दिखातीं

इंश्योरेंस कंपनियां ज्यादा उम्र के लोगों को हेल्थ पॉलिसी इश्यू करने में दिलचस्पी नहीं दिखाती हैं। अगर कंपनी पॉलिसी इश्यू करने के लिए तैयार होती है तो उसका प्रीमियम काफी ज्यादा होता है। पहले से चली आ रही बीमारियों के लिए तीन साल का वेटिंग पीरियड होता है, जो एक बड़ा चैलेंज है। इसलिए अगर आपकी ग्रुप हेल्थ पॉलिसी में मातापिता शामिल है और आप सिर्फ इस हेल्थ पॉलिसी पर निर्भर हैं तो कंपनी छोड़ने से पहले आपको इस पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में पोर्ट कराने की कोशिश करनी चाहिए।

नई पॉलिसी खरीदने में वेटिंग पीरियड की शर्त शामिल होगी

आपके पास कंपनी छोड़ने से पहले अलग पॉलिसी खरीदने का भी विकल्प है। लेकिन, यह थोड़ा मुश्किल है। अगर आप नई पॉलिसी खरीद भी लेते हैं तो पहले से चली आ रही बीमारियां तुरंत पॉलिसी में कवर नहीं होंगी। इसके लिए आपको तीन साल तक इंतजार करना पड़ेगा। इसलिए अच्छा होगा कि आप अपनी ग्रुप हेल्थ पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में बदलने की कोशिश करें। इंश्योरेंस एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया की नई गाइडलाइंस में कहा गया है कि बीमा कंपनियों को ग्रुप इंडेमनिटी पॉलिसी को इंडिविजुअल कवर में स्विच करने की सुविधा देनी होगी। इसमें सम अश्योरेंड और बेनेफिट्स में कोई बदलाव नहीं होंगे।

पॉलिसी स्विच कराने में वेटिंग पीरियड क्रेडिट कैरी फॉरवर्ड हो जाता है

इसका एक बड़ा फायदा यह है कि पहले से चली आ रही बीमारियों का वेटिंग पीरियड क्रेडिट कैरी फॉरवर्ड हो जाता है। इसका मतलब है कि अगर बीमा कंपनी ने दो साल का कवर दिया था तो आपके नौकरी छोड़ने के बाद आपके मातापिता को पहले से चली आ रही डेक्लेयर्ड बीमारियों के कवरेज के लिए सिर्फ एक साल इंतजार करना होगा। यह फायदे की बात है, क्योंकि वेटिंग पीरियड 3 साल से घटकर सिर्फ 1 साल रह जाएगा।

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स्विच कराते वक्त वेटिंग पीरियड के नियम और शर्त को समझ लें

आप अपने एचआर डिपार्टमेंट से ग्रुप पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में माइग्रेट करने के प्रोसेस के बारे में पूछ सकते हैं। हालांकि, स्विच करने से पहले आपको वेटिंग पीरियड के नियम और शर्त को अच्छी तरह से समझ लेना होगा। यह भी हो सकता है कि रिटेल पॉलिसी में आपको वह सभी बेनेफिट्स नहीं मिले जो आपको ग्रुप पॉलिसी में मिल रहे थे।

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