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रिटायरमेंट प्लानिंग की सबसे बड़ी दुविधा, सुरक्षित PPF का भरोसा या जोखिम भरे ELSS का ऊंचा मुनाफा... जानिए आपके लिए क्या है सही?

PPF VS ELSS: भारत में रिटायरमेंट प्लानिंग को लेकर निवेशकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) चुना जाए या इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ELSS)। दोनों ही विकल्प टैक्स बचत का फायदा देते हैं, लेकिन इनकी प्रकृति, जोखिम और रिटर्न में बड़ा अंतर है। आइए जानते हैं आपके लिए क्या सही है?

Shradha Tulsyanअपडेटेड Dec 14, 2025 पर 4:26 PM
रिटायरमेंट प्लानिंग की सबसे बड़ी दुविधा, सुरक्षित PPF का भरोसा या जोखिम भरे ELSS का ऊंचा मुनाफा... जानिए आपके लिए क्या है सही?

रिटायरमेंट प्लानिंग में PPF और ELSS दो लोकप्रिय टैक्स-सेविंग विकल्प हैं, जहां PPF सरकारी गारंटी वाला सुरक्षित निवेश है जबकि ELSS इक्विटी म्यूचुअल फंड जो ऊंचे रिटर्न की संभावना देता है। निवेशकों के लिए सही चुनाव जोखिम सहनशीलता, लॉक-इन और लक्ष्यों पर निर्भर करता है।

लॉक-इन और तरलता में बड़ा अंतर

PPF में 15 साल की लंबी लॉक-इन अवधि होती है, जिसे मैच्योरिटी के बाद 5-5 साल के ब्लॉक में बढ़ाया जा सकता है, लेकिन जल्दी निकासी सीमित है। ELSS का लॉक-इन मात्र 3 साल का है, जो इसे अधिक लचीला बनाता है निकासी के बाद निवेश जारी रख सकते हैं। कम जोखिम पसंद करने वाले रिटायरमेंट के करीब निवेशक PPF चुनते हैं, वहीं युवा ELSS से फायदा उठाते हैं।

रिटर्न और जोखिम की तुलना

PPF पर वर्तमान 7.1% ब्याज दर सरकारी तय होती है, जो निश्चित और टैक्स-फ्री है। ELSS बाजार से जुड़ा होने से 12-18% औसत रिटर्न दे सकता है, लेकिन उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है। उदाहरण से समझिए सालाना 1.5 लाख निवेश पर 15 साल में PPF से करीब 40.68 लाख का कॉर्पस बनता है, जबकि ELSS (15% रिटर्न मानकर) 84.6 लाख तक पहुंच सकता है।

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