White Oak Capital Management के सीईओ आशीष सोमैया ने CNBC-TV18 से 30 मार्च को हुई अपनी बातचीत में कहा कि अगर रूस-यूक्रेन वार लंबे समय तक जारी रहता है तो बाजार और बुरे दौर में जा सकता है लेकिन अगर दोनों देशों के रूख में कोई सकारात्मक बदलाव आता है तो बाजार में एकाएक तेजी आ सकती है।
करें निवेश या रहें बाजार से दूर
जब उनसे पूछा गया है कि क्या निवेशकों को इस समय बाजार में तुरंत निवेश ना करके इंतजार करना चाहिए और किनारे खड़ा रहना चाहिए और क्या बाजार काफी बढ़ चुका है तब उन्होंने कहा कि बाजार इस समय काफी दिलचस्प मोड़ पर है। उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा कि बाजार में कुछ दिनों से यथास्थिति (status quo) और यह एक काफी छोटे दायरे में कारोबार कर रहा है। हमें यह देखने को मिला है कि एक छोटे अवधि समय में बाजार 15,500-15,700 के दायरे में चक्कर लगाता रहा है। यानी बाजार जस का तस एक जगह खड़ा है और यह ऐसी स्थिति है जो ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल सकती। ऐसी स्थिति में बाजार वर्तमान स्तरों से तो नीचे की तरफ जाएगा या ऊपर की तरफ रूख करेगा। मेरा मानना है कि बाजार वहीं नहीं टहलता रहेगा जहां इस समय बना रहा है।
बाजार पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि यह इस समय दोराहे पर खड़ा नजर आ रहा है और किधर की तरफ रूख करेगा साफ तौर पर यह बताना मुश्किल है। ऐसे में निवेशकों को सलाह होगी कि इस अनिश्चितता भरे माहौल में अपने आधे पैसे इस समय लगाएं और आधे पैसे के साथ किनारे खड़े होकर मौके का इंतजार करें। बाजार में इस समय ऐसी स्थिति नहीं है जब निवेशकों से यह कहा जा सके कि आप अगले 3-6 महीने के लिए कहां पैसे लगाएं।
इस सवाल का जवाब देते हुए आशीष सौम्या ने कहा कि यह निवेशकों के नजरिए पर निर्भर करता है। अगर आपको लगता है कि स्थितियां सुधरने जा रही हैं तो आपको फाइनेंशियल स्टॉक पर नजर रखनी चाहिए। वहीं अगर आपको लगता है कि जल्द ही स्थितियों में कोई बदलाव नहीं आने वाला है तो आपको ऐसे सेक्टरों पर नजर रखना चाहिए जिनको वर्तमान स्थितियों से फायदा होगा।
क्या म्यूचुअल फंडों में आने वाला निवेश कायम रहेगा?
इस सवाल का जवाब देते हुए आशीष सौम्या ने कहा कि फंड में आने वाले फ्लो को किसी भी गिरावट की स्थिति में फायदा होता है आंकड़े हमें कुछ ऐसा ही संकेत देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि म्यूचुअल फंडों में आने वाले पैसा का प्रवाह दिसंबर की तुलना में जनवरी में बेहतर रहा है और जनवरी की तुलना में फऱवरी में बेहतर रहा है और मार्च में भी हमें अभी तक कोई निराशा नहीं हुई है।
हमारा मानना है कि लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म दो तरह के ट्रेंड होते हैं। लॉन्ग टर्म नजरिए से देखें तो 10 साल पहले म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में 2 लाख एसआईपीओ हर महीने देखने को मिलती थी जबकि इस समय हर महीने करीब 25 लाख एसआईपी होती है। बाजार में सेंटिमेंट कभी भी खट्टे -मीठे हो सकते हैं जिससे थोड़े समय के लिए कुछ उतार-चढ़ाव हो सकता है लेकिन बाजार में लॉन्ग टर्म में कोई भी कमजोरी आने की संभावना नहीं है।