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क्या आप घर या कार लोन लेने की सोच रहे हैं? ये '30%' वाला नियम जान लीजिए, कभी नहीं फंसेंगे!

30% EMI Rule: शुरुआत में 35-40% EMI बोझ नहीं लगती, लेकिन समय के साथ मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इमरजेंसी मेडिकल बिल या नौकरी में बदलाव आने पर आपके पास मार्जिन बहुत कम रह जाता है। ज्यादा EMI होने पर लोग सबसे पहले अपनी बचत और निवेश बंद करते हैं, जिससे वे लंबी अवधि में वेल्थ नहीं बना पाते

Abhishek Guptaअपडेटेड May 03, 2026 पर 10:21 AM
क्या आप घर या कार लोन लेने की सोच रहे हैं? ये '30%' वाला नियम जान लीजिए, कभी नहीं फंसेंगे!
आपकी प्रोफाइल देखकर आपकी सैलरी का 40-50% तक लोन दे सकते हैं, लेकिन 30% का नियम आपको सुकून की नींद देने के लिए बनाया गया है

Personal Finance Tips: घर या कार खरीदने का सपना हर किसी का होता है और इसके लिए बैंक भी आसानी से लोन ऑफर कर देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी सैलरी का कितना हिस्सा EMI में जाना चाहिए ताकि आपकी लाइफस्टाइल पर असर न पड़े? यहीं काम आता है '30 परसेंट का नियम'। यह नियम आपकी लोन एलिजिबिलिटी नहीं, बल्कि उसे चुकाने की क्षमता बताता है।

क्या है EMI का 30% नियम?

आसान शब्दों में कहें तो, आपकी महीने की कुल इनकम का अधिकतम 30 प्रतिशत हिस्सा ही EMI में जाना चाहिए। अगर आपकी सैलरी ₹1 लाख महीना है, तो आपकी सभी EMI- होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड ड्यूज मिलाकर ₹30,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वैसे तो बैंक आपकी प्रोफाइल देखकर आपकी सैलरी का 40-50% तक लोन दे सकते हैं, लेकिन 30% का नियम आपको सुकून की नींद देने के लिए बनाया गया है।

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