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Union Budget 2026 For PMAY: प्रधानमंत्री आवास योजना में क्या बदला? गरीबों के घर के सपने को मिला नया सहारा

Pradhan Mantri Awas Yojana (PMAY): Union Budget 2026 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को लेकर अहम घोषणाएं की हैं। इस योजना का मकसद गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सस्ती दरों पर घर उपलब्ध कराना है। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में बताया कि सरकार इस योजना को और व्यापक बनाने जा रही है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Feb 01, 2026 पर 6:18 PM
Union Budget 2026 For PMAY: प्रधानमंत्री आवास योजना में क्या बदला? गरीबों के घर के सपने को मिला नया सहारा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत कोई नई घोषणा नहीं की है। 2015 में शुरू हुई यह महत्वाकांक्षी योजना गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराने का लक्ष्य लेकर आई थी, जो शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लाखों परिवारों तक पहुंची। लेकिन इस बार बजट में इसके विस्तार, अतिरिक्त फंडिंग या नियमों में बदलाव का जिक्र तक नहीं हुआ, जिससे जरूरतमंदों में निराशा है।

PMAY-शहरी (PMAY-U) को पिछले साल 54,500 करोड़ रुपये का आवंटन मिला था, जो आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के कुल बजट का 36.5% था। अब PMAY-U 2.0 पर जोर है, जो राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से पात्र परिवारों को घर खरीदने, बनाने या किराए पर लेने में केंद्रीय सहायता देती है। योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), निम्न आय समूह (LIG) और मध्यम आय समूह-I (MIG-I) के लोग आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उनके या परिवार के किसी सदस्य के नाम पर कहीं पक्का मकान न हो।

राज्य PMAY-U 2.0 में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के साथ एमओयू साइन कर शामिल हो सकते हैं। योजना 2011 की जनगणना के अनुसार सभी वैधानिक शहरों, नोटिफाइड प्लानिंग एरिया और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी वाले इलाकों को कवर करती है। पहले से स्वीकृत लेकिन रद्द हुई PMAY-U इकाइयों (31 दिसंबर 2023 के बाद) के लाभार्थी PMAY-U 2.0 का फायदा नहीं ले सकेंगे। साथ ही, पिछले 20 साल में केंद्र, राज्य या लोकल बॉडी की किसी हाउसिंग स्कीम से लाभ ले चुके लोग अयोग्य हैं।

PMAY-G (ग्रामीण) भी चुपचाप चल रही है, जहां लक्ष्य के मुताबिक घर बनाए जा रहे हैं। लेकिन बजट सत्र में इसका कोई हाइलाइट न होने से आलोचना हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दौर में योजना का विस्तार जरूरी था। गरीब परिवारों को सस्ते मकान का सपना अब भी अधूरा सा लग रहा है। सरकार को चाहिए कि अगले चरण में फंडिंग बढ़ाए और डिलीवरी तेज करें।

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