Union Budget 2026: भारत में बजट सिर्फ आंकड़ों का डॉक्यूमेंट नहीं होता, बल्कि यह तय करता है कि आने वाले साल में देश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ेगी। हर साल केंद्र सरकार बजट को संसद में पेश करती है। इसमें सरकार यह साफ करती है कि उसने बीते वित्तीय वर्ष में कितना पैसा कमाया और कहां-कहां खर्च किया। साथ ही अगले साल के लिए उसकी कमाई और खर्च का अनुमान क्या है।
बजट के जरिए सरकार अपनी आर्थिक सोच, नीतियों और प्राथमिकताओं को सामने रखती है। खेती, शिक्षा, स्वास्थ्य, इंफ्रास्ट्रक्चर, रक्षा या सामाजिक योजनाएं, किस सेक्टर को कितना महत्व मिलेगा, यह सब बजट से ही तय होता है। इसलिए बजट आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री जगत और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तक, सभी के लिए बेहद अहम होता है।
बजट का सबसे बड़ा मकसद पारदर्शिता है। इसके जरिए सरकार जनता को बताती है कि टैक्स और अन्य स्रोतों से जुटाया गया पैसा कैसे खर्च किया जा रहा है। साथ ही यह भी साफ होता है कि देश की आर्थिक स्थिति फिलहाल कैसी है और सरकार आगे किन चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रही है। बजट विकास से जुड़े लक्ष्यों को तय करता है और यह दिखाता है कि सरकार रोजगार, महंगाई, निवेश और विकास को लेकर कितनी गंभीर है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बजट से सरकार की आर्थिक साख और सोच का अंदाजा लगाया जाता है।
बजट तैयार होने की लंबी प्रक्रिया
बजट अचानक तैयार नहीं होता। इसकी तैयारी कई महीनों पहले शुरू हो जाती है और इसमें अलग-अलग मंत्रालयों, विशेषज्ञों और संस्थानों की राय ली जाती है। यह पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के नेतृत्व में होती है।
बजट सर्कुलर से होती है शुरुआत
अगस्त या सितंबर के आसपास वित्त मंत्रालय सभी मंत्रालयों और सरकारी विभागों को बजट सर्कुलर भेजता है। इसमें उनसे अगले वित्तीय वर्ष के लिए अपने खर्च का अनुमान और योजनाओं का पूरा ब्यौरा मांगा जाता है। इसके बाद हर मंत्रालय अपनी जरूरतों और प्रस्तावित योजनाओं के हिसाब से बजट की मांग तैयार करता है।
अक्टूबर और नवंबर में वित्त मंत्रालय अलग-अलग मंत्रालयों के साथ बैठकें करता है। इन बैठकों में यह तय किया जाता है कि किस मंत्रालय को कितना बजट दिया जाएगा। अक्सर इन बैठकों में लंबी चर्चा और मोलभाव होता है, क्योंकि हर मंत्रालय अपनी योजनाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा फंड चाहता है। आमतौर पर नवंबर के अंत तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है।
नवंबर के आखिर तक सरकार बजट की एक शुरुआती रूपरेखा तैयार करती है, जिसमें आय और खर्च का मोटा अनुमान होता है। दिसंबर में इसी आधार पर बजट का पहला ड्राफ्ट बनाया जाता है, जिसे वित्त मंत्री के सामने रखा जाता है। इसमें प्राथमिकताएं तय की जाती हैं और अलग-अलग सेक्टर के लिए आवंटन को अंतिम रूप दिया जाता है। परंपरा के अनुसार यह ड्राफ्ट नीले रंग के कागज पर तैयार किया जाता है, जिसे ‘ब्लू बुक’ भी कहा जाता है।
जनवरी में अंतिम सलाह-मशविरा
जनवरी के महीने में वित्त मंत्री उद्योग संगठनों, बैंकों, अर्थशास्त्रियों और अन्य हितधारकों से मुलाकात करते हैं। इन बैठकों में सुझाव लिए जाते हैं, ताकि बजट ज्यादा संतुलित और व्यावहारिक बन सके। हालांकि इन सुझावों को मानना सरकार पर अनिवार्य नहीं होता।