इनकम टैक्स की नई रीजीम ने करीब छह साल का सफर तय किया है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे यूनियन बजट 2020 में पेश किया था। शुरुआत में इसमें टैक्सपेयर्स ने ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। लेकिन, अब ज्यादा इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स नई रीजीम में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर रहे हैं। इसकी वजह यह है कि सरकार ने इसे अट्रैक्टिव बनाने की लगातार कोशिश की है। सवाल है कि यूनियन बजट 2026 में इसे और अट्रैक्टिव बनाने के लिए क्या ऐलान हो सकते हैं?
टैक्सपेयर्स अभी भी कर रहे ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल
सरकार के इनकम टैक्स के नियमों को आसान और डिडक्शन-फ्री बनाने की कोशिश के बावजूद इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। सीनियर सिटीजंस को हेल्थकेयर, इंश्योरेंस और इंटरेस्ट वाली इनकम पर काफी डिडक्शन मिलता है, जिससे उनकी दिलचस्पी ओल्ड रीजीम में है। नई रीजीम की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें सामान्य डिडक्शन तक उपलब्द नहीं हैं।
नई रीजीम में ज्यादातर डिडक्शन की इजाजत नहीं
अभी नई रीजीम में टैक्सपेयर्स सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन और एनपीएस में एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन पर डिडक्शन क्लेम कर सकते है। एचआरए, टर्म लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन क्लेम करने की इजाजत इसमें नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ जरूरी डिडक्शन की इजाजत देने से नई रीजीम का अट्रैक्शन और बढ़ जाएगा। साथ ही इसे टैक्सपेयर्स के लिए आसान बनाए रखने के सरकार के मकसद पर भी असर नहीं पड़ेगा।
एचआर, हेल्थ इंश्योरेंस पर डिडक्शन शुरू करने की सलाह
आनंदराठी वेल्थ में म्यूचुअल फंड हेड श्वेता रजनी ने कहा, "एचआरए और हेल्थ इंश्योरेंस जैसे डिडक्शंस की इजाजत देने से नई रीजीम का आकर्षण बढ़ सकता है। साथ ही यह रीजीम टैक्सपेयर्स के लिए आसान भी बनी रहेगी।" इलाज पर आने वाला खर्च जिस तरह से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए मेडीक्लेम जरूरी हो गया है। मेडीक्लेम पर डिडक्शन नहीं मिलना नई रीजीम की एक बड़ी कमी है।
नई रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन भी बढ़ाया जा सकता है
कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभी नई रीजीम में टैक्सपेयर्स को सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन से राहत मिलती है। इनफ्लेशन और बढ़ती लिविंग कॉस्ट को देखते हुए इसे बढ़ाया जा सकता है। डेलॉयट इंडिया के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर नितिन बैजल ने कहा, "स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने से टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी, जबकि टैक्सपेयर्स के लिए यह रीजीम टैक्सपेयर्स के लिए जटिल भी नहीं होगी।"स्टॉकटिक कैपिटल के फाउंडर विजय माहेश्वरी ने कहा, "स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 1 से 1.25 लाख रुपये करने से सैलरीड टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलेगी। उनकी टेकहोम सैलरी इससे बढ़ जाएगी।"
एजुकेशन लोन और होम लोन बेनेफिट्स के बारे में सोच सकती है सरकार
एजुकेशन लोन और होम लोन आज परिवारों की आम जरूरत बन गए हैं। लेकिन, इन पर टैक्स बेनेफिट्स इनकम टैक्स की सिर्फ पुरानी रीजीम में मिलता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई रीजीम में ये दोनों बेनेफिट्स दिए जा सकते हैं, क्योंकि दोनों बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस से लिंक्ड हैं। इसलिए इन्हें क्लेम करना आसान है। बैंक स्टेटमेंट्स से इसकी जानकारी आसानी से मिल जाती है।